विरक्त योगी का मार्ग एकांत भजन में ही है आध्यात्मिक उन्नति – राजा राम गोदारा।।
विरक्त योगी का मार्ग एकांत भजन में ही है आध्यात्मिक उन्नति – राजा राम गोदारा।।


कालांवाली-(पवनशर्मा):- नैशनल हाईवे पर मम्मड नहर के नजदीक ब्रहमविद्या विहंगम योग आश्रम रोहिड़ावालीं में मासिक सत्संग के दौरान साधक राजा राम गोदारा ने कहा कि विरक्त के लिए भजन में दूसरे का संग विघ्न है। इसलिए पूर्ण विरक्त ज्ञानवान् योगी किसी को साथ न रख कर अकेले भजन करते हैं। भजन पूर्ण रूप से अकेला होता है। संसारी मनुष्यों के संग से अनेक द्वन्द्व, अशान्ति एवं माया-प्रपंच आया करता है। इसलिए योगाभ्यासी को संसारी जनों से अलग रहकर योगाभ्यास करना चाहिए। समाधिस्थ पूर्ण योगीश्वर होने पर वह योगी पुरुष सद्गुरु के आदेश अनुकूल संसार-भ्रमण कर विश्व का आध्यात्मिक कल्याण करते हैं। जगत जिसके साथ नहीं है, उसी पवित्र भक्त को प्रभु अपनी शरण में रखकर ज्ञान और आनन्द को पूर्ण रूप से प्रदान करते हैं। इसलिए विरक्त पुरुष को भीतर-बाहर सब ओर से संसार का त्याग कर प्रभु का भजन करना चाहिए। विरक्त योगाभ्यासी संसारी जनों से पृथक् रहकर प्रभु की उपासना करेंगे, तभी उन्हें सुख-शान्ति की प्राप्ति होगी अन्यथा संसारी जनों के सम्बन्ध से विघ्न और अनेक उपद्रव सामने आने लगेंगे। इस अवसर पर साधु राम रवि थोरी राय वीरेंद्र गोदारा ओम महिच ओम गोदारा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।। #newstodayhry @newstodayhry



