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कुशवाहा परिवार में श्रीमद्भागवत कथा सम्पन्न, कथावाचक ने बताया जीवन का सार II

कुशवाहा परिवार में श्रीमद्भागवत कथा सम्पन्न, कथावाचक ने बताया जीवन का सार II

गंजबासौदा-(मनोज कुमार शर्मा):- कुशवाहा परिवार में हो रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ मैं कथावाचक आचार्य पंडित विकास आनंद ऐलिया जी ने सातवें दिन भागवत कथा को विश्राम दिया । कथा व्यास ने कहा मनुष्य शरीर मिलना अत्यंत दुर्लभ है। मगर जिसे मिल गया, उसे इसकी दुर्लभता का अहसास नहीं है। उन्होंने कहा यह शरीर अनित्य है, इसमें सुख नहीं हैं। मगर हम इस शरीर से परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। उस महान आनंद का अनुभव कर सकते हैं। कथा का विश्राम जीवन में कभी भी नहीं होना चाहिए। श्रीमद्भागवत महाग्रंथ का चिंतन ही हमें हर पल परमात्मा का स्मरण करने की प्रेरणा देता है। जीवन कब तक जीये ये अपने हाथ में नहीं है, लेकिन जीवन किस प्रकार जीये ये अपने हाथ में है। भगवान का स्मरण आ जाना ही प्रभु कृपा का विशिष्ट प्रभाव है जिस प्रकार मुट्ठी से रेत के एक-एक कण हाथ का परित्याग करते हैं, उसी प्रकार आयु भी प्रत्येक क्षण घट रही है। भगवान का मायाजाल ही संसार है। परमात्मा को आपदा स्थिति में ही स्मरण नहीं करना चाहिए। प्रत्येक क्षण याद करो। मनुष्य लोभी है। संसार के रस को लेने में मगन हो जाता है। काल की आहट को पहचान नहीं पाता।

मित्रता का महत्व बताया

पंडित एलिया ने श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र को लेकर कहा कि जिस प्रकार भगवान ने अपने मित्र का भव्य आदर कर उसे उसी अवस्था में भेजा जिस अवस्था में वो आए थे। स्वामी जी ने समझाया कि भगवान अपने मित्र सुदामा को कुछ देते तो सुदामा के मन में ग्लानि होती। समाज हंसता और कहता कि लेने के लिए सुदामा ने मित्रता बताई। मेरी मित्रता छोटी हो जाती। संबंध हमेशा इस तरह निभाना चाहिए, जिससे गरिमा को ठेस नहीं लगे। कथा में उपस्थित मुख्य यजमान जितेंद्र कुशवाहा जी अंकल जी एवं समस्त भक्तगण ने मिलजुल कर के सहयोग किया II #newstodayhry @newstodayhry

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