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किसानों को पराली न जलाने के लिए किया जा रहा जागरूक II

किसानों को पराली न जलाने के लिए किया जा रहा जागरूक II

स्कूली विद्यार्थियों व कृषि विभाग की टीमों ने ग्रामीणों को किया पराली प्रबंधन को लेकर जागरूक:-

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण अंकुश के लिए जिला में तेजी से जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जागरूकता टीमों ने मंगलवार को जिला में नानुआना, धोतड़, खारियां, मल्लेकां, कुत्ताबढ़, बचेर, बाहिया, असीर में ग्रामीणों के साथ बैठक करके जागरूक किया। टीमों ने पराली जलाने से भूमि, मानव जीवन, पर्यावरण व पशु पक्षियों को होने वाले नुकसान के बारे में अवगत करवाया। साथ ही पराली प्रबंधन के फायदों के बारे में भी अवगत करवाया। इसके अलावा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय करीवाला के विद्यार्थियों ने गांव में जागरूकता रैली निकाली और ग्रामीणों को पराली न जलाने का आह्वान किया। कृषि विभाग के उप निदेशक डा. सुखदेव सिंह ने बताया कि पराली जलाने से जहां वातावरण प्रदूषित होता है, वहीं मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। जिला प्रशासन द्वारा पराली प्रबंधन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं और किसानों को आधुनिक मशीनों के माध्यम से सहायता दी जा रही है

उन्होंने बताया कि:-

पराली जलाने से खेत की ऊपरी परत का तापमान बहुत बढ़ जाता है, जिससे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव और केंचुए व दूसरे मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। इससे खेत की उर्वरता घटती है और आने वाले वर्षों में फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगातार पराली जलाने से खेत की मिट्टी कठोर हो जाती है, जिसके कारण फसल उत्पादन घटता है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से भारी मात्रा में धुआं और जहरीली गैसें वातावरण में फैल जाती हैं। इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। इस मौसम में धुंध और स्मॉग की समस्या बढ़ जाती है, यह न केवल किसानों बल्कि समूचे समाज के स्वास्थ्य के लिए खतरा है।

पराली का धुआं सांस संबंधी रोगों को बढ़ावा देता है:-

जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, इस मौसम में खांसी, दमा, एलर्जी और आंखों में जलन के मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं इस प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। धुएं और स्मॉग के कारण दृश्यता कम होने से सडक़ हादसों की संभावना बढ़ जाती है। जिला यातायात पुलिस ने बताया कि पराली जलाने के दौरान कई बार मुख्य मार्गों पर दृश्यता घट जाती है, जिससे दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंनेे बताया कि सरकार की ओर से सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, रोटावेटर जैसी मशीनें किसानों को सब्सिडी दरों पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन मशीनों की मदद से पराली को खेत में मिलाकर जैविक खाद में बदला जा सकता है। इसके अतिरिक्त, पराली से बायोएनेर्जी और पशु चारे के रूप में भी उपयोग के प्रयास किए जा रहे हैं।। #newstodayhry @newstodayhry

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