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आपातकाल के योद्धा: बाबू मुरलीधर जी कांडा का संघर्ष और प्रेरणा।।

आपातकाल के योद्धा: बाबू मुरलीधर जी कांडा का संघर्ष और प्रेरणा।।

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- आपातकाल के दौर में पिता जी ने प्रताड़ना सही लेकिन मां भारती की सेवा में अडिग रहे। आपका ताम्रपत्र सम्मान हमें प्रेरणा और ऊर्जा देता है। आपने यही सिखाया कि अंधेरा कितना भी घना हो, सूरज की रोशनी को कोई रोक नहीं सकता। 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में इमरजेंसी यानी कि आपातकाल लगाने की घोषणा की थी, जो मार्च 1977 तक चली थी। देश के काले अध्याय के रूप में देखे जाने वाले इस दुर्भाग्यपूर्ण काल के 50 साल पूरे हो रहे हैं। उस समय देश के नागरिकों की स्वतंत्रता में कटौती की गई, जनता को प्रताड़ना सहनी पड़ी थी, उसे याद कर आज भी लोग सहम जाते हैं। इमरजेंसी के दौरान विपक्षी पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था। मेरे पिता जी बाबू श्री मुरलीधर जी कांडा एडवोकेट ने भी आपात काल का डटकर विरोध किया। समर्पित स्वयं सेवक और जनसंघ के प्रमुख नेताओं में शामिल पिता जी बाबू मुरलीधर जी कांडा को गिरफ्तार कर लिया गया। काफी यातनाएं दी गईं। लेकिन मां भारती के इस लाल ने सभी प्रताड़नाओं को सहा। आज इस काले दिन के पचास साल पूरे हुए हैं। पिता जी, आपने उस दौरान जेल में रहते हुए, विपरीत परिस्थितियों में, संकटकाल में कैसे डट कर, अडिग रहकर खुद को मजबूत रखा जाए यह शिक्षा दी।आपके क्रांतिकारी विचार, राष्ट्रभक्ति, गौसेवा, जन जन को समर्पित जीवन पूरे कांडा परिवार का मार्गदर्शन करता है और करता रहेगा। आपातकाल आंदोलन के लिए सरकार द्वारा आपको दिया गया यह ताम्र पत्र हमारे लिए प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत है। आपातकाल के काले अध्याय के 50 साल पूरे होने पर आपसे सीखी यह बात मजबूती देती है कि “अंधेरा कितना भी घना हो, सूरज की रोशनी को कोई रोक नहीं सकता।” आपने यही सिखाया।। #newstodayhry @newstodayhry

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