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आगरा चौक पर खड़े मजदूरों के लिए नहीं है छांव भी, सड़क हादसे का हर पल खतरा II

आगरा चौक पर खड़े मजदूरों के लिए नहीं है छांव भी, सड़क हादसे का हर पल खतरा II

आगरा चौक पर खड़े मजदूरों के लिए नहीं है छांव भी, सड़क हादसे का हर पल खतरा

डा. हरित बैसला ने नगर परिषद चेयरमैन को सौंपा ज्ञापन, कहा– मजदूरों के लिए तय हो सुरक्षित स्थान:-

पलवल-(निकुंज गर्ग):- पलवल शहर का आगरा चौक रोज़ाना सुबह एक अस्थायी मज़दूर मंडी का रूप ले लेता है, जहां सैकड़ों मज़दूर काम की तलाश में सड़क किनारे घंटों खड़े रहते हैं। धूप हो या बारिश, ठंडी हवा हो या गुजरती गाड़ियां—इन मजदूरों के पास न तो बैठने की जगह है, न छाया और न ही कोई सुरक्षा। शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले इस चौराहे पर हर पल हादसे की आशंका बनी रहती है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर आज पूर्व विधानसभा प्रत्याशी डा. हरित बैसला ने नगर परिषद चेयरमैन डा. यशपाल को एक ज्ञापन सौंपा और मजदूरों के लिए एक निश्चित, सुरक्षित और सुविधायुक्त स्थान चिन्हित करने की मांग की।

डा. हरित बैसला ने कहा:

“आगरा चौक पर सुबह-सुबह की स्थिति बेहद चिंताजनक होती है। मज़दूर सड़क किनारे खड़े रहते हैं और भारी ट्रैफिक के बीच हर समय जान जोखिम में होती है। ये लोग हमारे समाज की रीढ़ हैं, और इन्हें बैठने, छाया, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं देना नगर परिषद की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है।” हरियाणा सरकार ने नगर परिषद को विकास कार्यों के लिए अच्छा-खासा बजट दिया है, उस बजट में मजदूर वर्ग का भी अधिकार बनता है। विकास में मजदूरों की भागीदारी, लेकिन सुविधाओं से वंचित क्यों?

डा. बैसला ने यह भी सवाल उठाया कि शहर की सड़कों और भवनों का निर्माण करने वाले मजदूर खुद किन हालातों में खड़े होते हैं, इस पर आज तक किसी का ध्यान क्यों नहीं गया। “ये वो लोग हैं जो दूसरों के लिए आशियाना बनाते हैं लेकिन खुद सड़क पर भी चैन से खड़े नहीं हो सकते। अगर उनके लिए एक छोटी-सी शेड भी नहीं बन सकती, तो विकास के दावे खोखले लगते हैं।

चेयरमैन डा. यशपाल ने दिया भरोसा:-

नगर परिषद चेयरमैन डा. यशपाल ने ज्ञापन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि:

यह वाकई ज़मीनी स्तर की जरूरत है। नगर परिषद जल्द ही आगरा चौक या उसके निकट कोई उपयुक्त स्थान चिन्हित कर वहां बैठने, छाया और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। यह कदम यातायात व्यवस्था को भी सुचारू बनाएगा।” उन्होंने कहा कि शहर को व्यवस्थित करने के लिए मजदूरों के बैठने की अलग जगह तय करना ज़रूरी है ताकि आमजन को भी परेशानी न हो और मज़दूरों को भी सम्मान और सुरक्षा मिले।

स्थायी समाधान की उठी मांग:

ज्ञापन में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि:-

मज़दूरों के लिए स्थायी श्रमिक चौपाल बनाई जाए:-

वहां शेड, बेंच, पेयजल, शौचालय और सूचना बोर्ड लगाए जाएं:-

प्रतिदिन काम देने आने वालों के लिए वहाँ पर सूचीबद्ध व्यवस्था हो:-

यह सारी व्यवस्था सरकारी बजट या CSR फंड के तहत की जा सकती है सिर्फ मजदूरों की सुविधा नहीं, बल्कि शहर के ट्रैफिक, सुरक्षा और मानवता का मुद्दा है। डा. हरित बैसला द्वारा उठाया गया यह कदम समाज के उस वर्ग की आवाज़ है, जो दिनभर शहर को खड़ा करता है लेकिन खुद सड़क पर खड़ा रह जाता है अब देखना होगा कि नगर परिषद इसे कितनी जल्दी अमल में लाती है।। #newstodayhry @newstodayhry

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