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शिवलिंग आत्मस्वरूप की ज्योति और भक्ति का प्रतीक: आशिष बजाज II

शिवलिंग आत्मस्वरूप की ज्योति और भक्ति का प्रतीक: आशिष बजाज II

शिवलिंग कोई शरीर का अंग नहीं है। यह आत्म स्वरूप ,ज्योति स्वरूप है:-

सिरसा-(अक्षित कम्बोज ):- शिवलिंग कोई शरीर का अंग नहीं है। यह आत्म स्वरूप ,ज्योति स्वरूप है भगवान नारायण व भगवान ब्रम्हा के मध्य जब श्रेष्ठता को लेकर मतभेद हुआ तो भगवान शंकर ने ब्रम्हा व विष्णु के मध्य ज्योतिर्मय शिवलिंग की स्थापना की। इसी दिन को हम शिवरात्रि के नाम से जानते और पूजते हैंl शिवरात्रि पर्व जो हम मनाते हैं वह शिवलिंग का प्राकट्य दिवस है। शिवलिंग के माध्यम से हम निराकार निर्गुण की पूजा करते हैं।इस मार्ग में भक्त अपने को सदैव कम आंकता है। इस राह में अहंकार नहीं होता है। और जिस मार्ग में अहंकार का बोध नहीं होता है और मैं और अहम नहीं आता है। वहां पर श्रद्धा व विश्वास का जन्म होता है और जहां श्रद्धा व विश्वास होता है वहां ईश्वर बड़ी आसानी से भक्त तक पहुंच जाते हैं। ज्योतिर्लिंग प्रकट की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान ब्रह्मा ने खुद को सभी देवताओं में श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि इस सृष्टि की रचना करने में मेरा सबसे अहम योगदान है। शिव पुराण की कथा सुनाते हुए संत ने कहा कि भगवान शिव ने अपने क्रोध से कालभैरव का अवतार लिया। यह अवतार अत्यंत भयंकर और बलशाली था। कालभैरव क्रोध में तुरंत ब्रह्मा के पास पहुंचे और उनके पांच मुखों में से एक मुख आकाश की ओर था उस को काट दिया। यह मुख ब्रह्मा के घमंड और अहंकार का प्रतीक था। इस घटना के बाद ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान शिव से क्षमा मांगी। शिवलिंग की पूजा आत्मस्वरूप को जानने की साधना है। ईश्वर को ज्ञान व भक्ति दोनों मार्ग से प्राप्त किया जा सकता है। दोनों मार्ग को श्रेष्ठ बताया। ज्ञान मार्गीय की तुलना में भक्ति मार्ग को अधिक सुगम व बेहतर बताया। भक्ति मार्ग ऐसा होता है, जिसमें सर्वस्व समर्पण का भाव होता है।। #newstodayhry @newstodayhry

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