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प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में बिजली की दरों में की गई अत्यधिक वृद्धि।।

प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में बिजली की दरों में की गई अत्यधिक वृद्धि।।

भिवानी-(अभिषेक ठाकुर):- प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में बिजली की दरों में की गई अत्यधिक वृद्धि व्यापारी वर्ग एवं आम जनता दोनों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। इससे न केवल व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आमजन का घरेलू बजट भी चरमरा गया है। बिजली की दरों में चुपचाप की गई यह वृद्धि आम नागरिकों के जीवन पर सीधा प्रभाव डाल रही है। चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री भिवानी इसका पुरजोर विरोध करता है। यह बात चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, भिवानी के प्रधान डॉ. पवन बुवानीवाला ने उद्योगपतियों से विचार विमर्श करने के पश्चात जिला उपायुक्त एवं बिजली बोर्ड के एस सी को ज्ञापन सौंपते हुए कही। उन्होंने कहा कि बिजली बिलों में फिक्स्ड चार्ज की वजह से उपभोक्ताओं पर अधिक बोझ पड़ा है। यहां तक कि कामर्शियल उपभोक्ता को भी एलटी एंड एचटी आपूर्ति शुल्क के साथ मिलाकर भी झटका दिया है। फिक्सड चार्ज भी 165 रुपये प्रति किलोवाट से बढ़ाकर 290 रुपये प्रति केवीए कर दिए है। दरें भी 6.65 रुपये प्रति यूनिट से 6.95 प्रति यूनिट की हैं। जिन औद्योगिक उपभोक्ताओं के पास 50 किलोवाट से अधिक लोड है, उनकी 6.55 रुपये प्रति यूनिट की दरो को बढ़ाकर 7.25 रुपये प्रति यूनिट किया है। महोदय बिजली कंपनियां 7964.28 करोड़ यूनिट की विभिन्न बिजली उत्पादन इकाइयों से बिजली 3.12 रुपये प्रति यूनिट के दर खरीद रही हैं। वे उपभोक्ताओं को 7 रुपये 29 पैसे प्रति यूनिट की दर से बेच रही हैं। कुल खरीदी गई बिजली में से उपभोक्ता को केवल 6916 करोड़ यूनिट दी जानी हैं। रास्ते में नुकसान 22 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए उपभोक्ता को उस ऊर्जा के लिए 22 प्रतिशत अधिक भुगतान करना होगा, जो उन्हें दी ही नहीं है। डॉ. पवन बुवानीवाला ने व्यापारी व उद्योगपतियों से बातचीत करने के उपरांत कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा बिजली के रेट में भारी भरकम बढ़ौतरी करने से प्रदेश से उद्योग पलायन करने पर मजबूर होगा। सरकार ने निर्धारित शुल्क 165 रुपए से बढ़कर 290 रुपए करके उद्योगपतियों की जेबों में डाका डालने का काम किया है। बिजली के रेट में बढ़ौतरी के कारण उद्योगपतियों पर लगभग 2300 करोड़ रुपए का आर्थिक बोझ ओर बढ़ेगा। सरकार को बिजली की दरों में बढ़ौतरी जनहित में तुरंत वापिस लेनी चाहिए। डॉ. पवन बुवानीवाला ने कहा कि उद्योगों को पहले 7.60 रुपए प्रति यूनिट बिजली की दर थी जिसे बढ़ाकर 7.95 रुपए प्रति यूनिट कर दी गई है जबकि सरकार सोलर प्लांट से 2.95 रुपए प्रति यूनिट बिजली खरीद रही है और उपभोक्ता को 7.95 रुपए प्रति यूनिट बिजली बेच रही है। सरकार बिजली खरीद कर उपभोक्ता से 5 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से कमाई कर रही है। गर्ग ने कहा कि जब उद्योगपति बिजली का कनेक्शन लेता है उस समय बिजली ट्रांसफार्मर, खंबे, तार व पूरी सिक्योरिटी अपनी तरफ से बिजली विभाग को भरता है। उसके बाद फिक्स चार्ज लेने का कोई मतलब नहीं होता। सरकार को उद्योगपतियों से ट्रांसफार्मर, खंभे, तार, सिक्योरिटी के पैसे लेने के बाद फीस चार्ज नहीं लेना चाहिए। सरकार ने रिहायशी व कमर्शियल में भी बिजली के दामों में बढ़ौतरी की है।सरकार को तुरंत प्रभाव से बिजली की दरों – की बढ़ौतरी को वापिस लेना चाहिए जबकि व्यापारी, उद्योगपति व आम जनता पहले ही सरकार द्वारा अनाप-शनाप टैक्सों के बोझ से तंग है ऊपर से बिजली की दरों में बढ़ौतरी करना सालासर गलत है।। #newstodayhry @newstodayhry

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