आदियोगी शिव का दर्शन: भस्म, माया और आत्मा की अमरता की सीख II
आदियोगी शिव का दर्शन: भस्म, माया और आत्मा की अमरता की सीख II


सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- भगवान शिव कोई साधारण देव नहीं हैं बल्कि योगियों के भी आदियोगी हैं, और उनके शरीर पर लगी भस्म सिर्फ राख नहीं बल्कि एक दर्शन है जो जीवन के सत्य को उजागर करती है। यह सभी लाइन लाॅयन क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय ध्यान मंदिर में सावन मास पर भक्तों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा भगवान शिव हमें अपने शरीर पर भस्म लगाकर सिखाते है कि यह शरीर, धन, पद और प्रतिष्ठा सब कुछ एक दिन भस्म हो जाना है। इसलिए जो इस सत्य को जान लेता है वही सच्चा योगी बनता है। श्री साहुवाला ने कहा भगवान शिव का भस्म धारण करना इस बात का संकेत है कि माया से परे होकर, सत्य की ओर बढ़ना ही असली साधना है जो हमे अहंकार छोड़कर विनम्र होने की प्रेरणा देते है। उन्होंने कहा भगवान शिव भस्म लगााकर हमे यह सिखाते है कि जिसे दुनिया त्याग देती है, मैं उसे अपनाता हूँ तथा उसे आश्रय देता हूँ। उन्होंने कहा भस्म शरीर को शुद्ध करती है और पापों को जलाकर हमें मुक्त करती है तथा यह भगवान शिव का आभूषण है और यह ध्यान, साधना, समाधि, उपासना, पूजा में सहायक है। उन्होंने कहा भगवान शिव का भस्म लगाना सिर्फ यह सधारण परम्परा नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच स्थित एक गहण संदेश हैं कि जब सब कुछ नष्ट हो जाता है तब भी आत्मा अजर-अमर रहती हैं। उन्होंने कहा शिव स्वयं शमशानवासी है-जहाँ जीवन और मृत्यु का भेद समाप्त हो जाता है तथा भस्म वहाँ की साक्षात पहचान है। यही कारण है कि भगवान शिव को महाकाल भी कहा जाता है। उन्होंने कहा जिस पर भगवान भोलेनाथ की कृपा होती है उसकी परीक्षा कठिन जरूर होती हैं, परंतु अंत हमेशा सर्वश्रेष्ठ होता है और उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इस अवसर पर भावना, पायल, नीलम, पारूल, रीना, संदीप, विजय, पवन, रविद्र, वासु उपस्थित थे।। #newstodayhry @newstodayhry



