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तन-मन की पवित्र विद्या है योग II

तन-मन की पवित्र विद्या है योग II

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- प्रभु रामलाल नर सेवा नारा‌यण सेवा योग ट्रस्ट हुडा, सिरसा भवन नंबर-2266, सेक्टर-20, पार्ट-3 में योग गुरु रघुबीर महाराज ने मासिक सत्संग के सुअवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने सम्बोधन में फरमाया कि योग तन-मन की पवित्र विद्या है। यह तन को स्वस्थ रखना सिखाता है तथा मन को पवित्र करना। पहले यह हमें समझ देता है कि मनुष्य को अपने तन को कैसे निरोग रखना। अमृत वेला में उठकर योग करता है। सुखानिकलते से पहले का समय अमृत वेला है।

3 से 6 बजे प्रात: उठकर अपने शरीर को निरोग रखने का योग करना है। योग है जहां, नहीं बिकता रोग वहां। इस संबंध में दास ने भी ईश्वर कृपा से लिखा है, सवेरे उठो, अमृत हवावां पियो। योग करो ते मस्ती नाल जियो। योग निरोगता व महान खुशी की साधना है। आज के तनाव व भागदौड़ के युग में योग का महत्व और भी बढ़ जाता है। आजकल तो डॉक्टर भी रोगियों को योग व ध्यान करने की सलाह देते हैं। रघुबीर महाराज में आगे फरमाया कि जब तन योग साधना करने से ठीक हो जाता है, तब आनन्द है, ध्यान में बैठने का। ध्यान मनुष्य को तनाव रहित करता है। ध्यान मनुष्य को आनंद, खुशी, शान्ति देता है, जो राजा के पास भी नहीं होती। रघुबीर महाराज ने अंत में फरमाया कि तन-मन का योग अपनाएं स्वस्थ, सुख शान्ति पाएं। इस पवित्र मौके पर शक्ति चावला, पृथ्वी सिंह बैनीवाल, यश चावला योगाचार्य, रविंद्र सिंह, नरेश छाबड़ा, लक्ष्य, राज चावला, सुमन रानियां, संगीता, अंकिता, गौरी, अयान, आरशिया मौजूद थे।। #newstodayhry @newstodayhry

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