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गीता जयंती पर मिला आध्यात्मिक संदेश: स्वामी रमेश साहुवाला II

गीता जयंती पर मिला आध्यात्मिक संदेश: स्वामी रमेश साहुवाला II

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद् गीता का अमर ज्ञान दिया था, जो केवल धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि एक महान मार्गदर्शक है, जो सत्य, धर्म, कर्म, और मोक्ष की राह दिखाती है। ये शब्द लाॅयन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय कोर्ट काॅलोनी में गीता जंयती के अवसर पर साधकों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा अमूल्य ग्रंथ है जो हर व्यक्ति को जीवन की सच्चाई से परिचित कराता हैं तथा यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, आत्मा की शुद्धता पर ध्यान दें और भगवान के प्रति समर्पण रखें। उन्होंने कहा श्रीमद्भगवद्गीता मानव जीवन के सर्वांगीण कल्याण की महान दृष्टि रखने वाला सारभूत ग्रंथ है तथा आहार विहार से लेकर गूढ़तम आत्मविद्या तक का समग्र ज्ञान अत्यंत सरल शैली में श्रीमद्भगवद्गीता में निहित है।

श्री साहुवाला ने कहा कि:-

जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होते हैं तथा साधु पुरुषों का उद्धार करते हैं और पाप कर्म करने वालों का विनाश करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने कहा श्रीमद्भगवद्गीता हमें धर्म, कर्म, मोक्ष, आत्म-साक्षात्कार, योग, ध्यान, भगवान की भक्ति, प्रेम, आत्म-विचार, आत्म-निरीक्षण, जीवन के मूल सिद्धांत, उद्वेश्य, कर्म के सिद्धांत, उसके परिणाम तथा धर्म-अधर्म के बीच का अंतर सिखाती हैं। उन्होंने कहा श्रीमद्भगवद्गीता में सृष्टि उत्पत्ति, जीव विकास क्रम, हिन्दू संदेवाहक क्रम, मानव उत्पत्ति, योग, धर्म, कर्म, ईश्वर, भगवान, देवी, देवता, उपासना, प्रार्थना, यम, नियम, राजनीति, युद्ध, मोक्ष, अंतरिक्ष, आकाश, धरती, संस्कार, वंश, कुल, नीति, अर्थ, पूर्वजन्म, जीवन प्रबंधन, राष्ट्र निर्माण, आत्मा, कर्मसिद्धांत, त्रिगुण की संकल्पना, सभी प्राणियों में मैत्रीभाव आदि सभी की जानकारी है।

श्री साहुवाला ने कहा कि:-

श्रीमद्भगवद्गीता योगेश्वर श्रीकृष्ण की वाणी है जिसके प्रत्येक श्लोक में ज्ञानरूपी प्रकाश है तथा इसके पढ़ने व सुनने से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा इसमें ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है तथा इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है उन्होंने कहा श्रीमद्भगवद्गीता को अर्जुन के अलावा और संजय ने सुना और उन्होंने धृतराष्ट्र को सुनाया तथा श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने-574, अर्जुन ने-85, संजय ने 40 और धृतराष्ट्र ने-1 श्लोक कहा है। उन्होंने कहा श्रीमद्भगवद्गीता हमें सिखाती हैं कि केवल शरीर मरता हैं जबकि आत्मा अमर है तथा हमे श्रीमद्भगवद्गीता के अद्भुत ज्ञान को अपने जीवन में अपनाना चाहिए और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होना चाहिए जिससे हमारा तनाव कम होगा और मन शांतचित रहेंगा। इससे पूर्व रजनी सोनी ने मुख्य अतिथि रमेश साहुवाला का स्वागत किया तथा सभी ने भगवान श्रीकृष्ण के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया तथा इस अवसर पर नीलम, पारूल, रीना, भावना, पायल, संदीप , विजय, आरती, रीया मोगा आदि उपस्थित थे।। #newstodayhry @newstodayhry

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