बच्चों के मन की भावनाओं को पंख लगाएगा ‘द लिट्ल एक्सप्लोरर्स II
बच्चों के मन की भावनाओं को पंख लगाएगा ‘द लिट्ल एक्सप्लोरर्स II

बच्चों के मन की भावनाओं को पंख लगाएगा ‘द लिट्ल एक्सप्लोरर्स :-
सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- अभिभावक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की स्किल पर भी दें ध्यान: निकिता सिरसा। बच्चे कच्चे घड़े की मानिंद होते हैं। उन्हें हम जिस प्रकार से ढालना चाहें, वो ढल जाते हैं। वर्तमान समय में स्कूलों में बच्चों को किताबी ज्ञान तो दिया जा रहा है, लेकिन उनकी भावनाओं को बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। हर बच्चे के मन में अपनी जिज्ञासा व भावनाएं हैं , लेकिन अभिभावकों के पास समय का अभाव व स्कूल में सिर्फ और सिर्फ सिलेबस पूरा करने की होड़ के चलते बच्चे अपने मन की भावनाओं को मन में ही मसोस कर रह जाते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सिरसा निवासी महिला टीचर निकिता देवगुण ने ‘द लिट्ल एक्सप्लोरर्स’ (मैगजीन) के माध्यम से बच्चों के मन की भावनाओं को पंख लगाने का प्रयास किया है। इस प्लेटफार्म के माध्यम से बच्चों ने न केवल अपनी स्किल को विकसित किया है, बल्कि ऐसी अद्भुत कविताएं, पेंटिंग बना डाली, जिनके बारे में बच्चे तो क्या बड़े भी नहीं सोच सकते। साथ ही इस कंसेप्ट के माध्यम से बच्चे मोबाइल की लत से भी दूर रह सकेंगे।
बच्चों की छुपी प्रतिभाओं को निखारता अनोखा शैक्षिक प्रयास:-
शहर के हिसार रोड स्थित खन्ना कॉलोनी निवासी व निजी स्कूल में बतौर एसएस टीचर नियुक्त निकिता देवगुण (एमफिल अर्थशास्त्र, एमए इतिहास, बीएड) ने बताया कि उन्होंने टीचिंग के दौरान ये महसूस किया कि बच्चों को किताबी ज्ञान तो दिया जा रहा है, लेकिन उनकी स्किल को विकसित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। उन्होंने बताया कि सीबीएसई की ड्यूटी के दौरान केवी इंटरनैशनल स्कूल में उनकी नियुक्ति हुई। इस दौरान आईकेएस (इंडियन नोलेज सिस्टम) का एक बोर्ड था। नोलेज पर तो सभी काम कर रहे हैं, पेंट नहीं कर सकते तो कविता के रूप में लिखें, कविता नहीं तो उसे लेख के रूप में उकेरें। उन्होंने महसूस किया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए, जिससे आने वाले समय में भारत देश को अच्छे पेंटर, लेखक व स्पीकर्स दिया जा सकें। इसी को मदद्ेनजर रखते हुए उन्होंने ठाना कि अब चाहे कुछ भी हो जाए, वो बच्चों की स्किल को एक नया आयाम देने के लिए नया कंसेप्ट द लिट्ल एक्पलोरर्स के रूप में लेकर आई, जोकि ऐसा कंसेप्ट अभी तक भारत में और कहीं भी नहीं है। अभी 5 एक्सपर्ट की टीम इस कंसेप्ट पर काम कर रही है।
पेंटिंग, कविताओं से भावनाओं को किया व्यक्त:-
निकिता देवगुण ने बताया कि इस कंसेप्ट को लेकर बच्चों में जबरदस्त उत्साह है। बच्चे अपनी भावनाओं को पेंटिंग, कविताओं व लेख के द्वारा कागज पर उकेर रहे हैं। यहां तक की उनके टाइटल भी वो खुद दे रहेहैं, जोकि बहुत बड़ी बात है। उन्होंने बताया कि द वेल्यू ऑफ आप्रेशन सिंदूर, द रोल ऑफ सिटीजन इन डेमोके्रसी सहित अनेक लेख व कविताएं बच्चे लिख चुके हैं । संसद में जिस प्रकार से भाषा को लेकर विवाद चल रहा है, उस पर भी बच्चों ने बड़े अच्छे लेख लिखे हैं।
10 से 15 स्कूलों का कर चुकी हैं भ्रमण:-
उन्होंने बताया कि इस कंसेप्ट को लेकर वे अब तक शहर के 10 से 15 स्कूलों का भ्रमण कर चुके हैं। इस कंसेप्ट को लेकर स्कूल प्रिंसीपल से लेकर बच्चों तक में जबरदस्त उत्साह है और बच्चे उनसे लगातार जुड़ रहे हैं और अपनी रचनाएं, पेंटिंग्स व लेख लिखकर हमें भेज रहे हैं। अभिभावकों से अपील: निकिता देवगुण ने अभिभावकों से आह्वान किया कि किताबी ज्ञान तो बच्चों को कहीं से भी मिल जाएगा, इसलिए वे किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों की स्किल को विकसित करने पर भी पूरा ध्यान दें। अभिभावक बच्चों की प्रतिभा जैसे लेख, पेंटिंग्स, कविता को पढ़ें, देखें और उन्हें समझने का प्रयास करें। बच्चों से लगातार बात करें, उनकी रूचि को परखने का प्रयास करें। जबरदस्ती कुछ भी बच्चों पर न थोपें।। #newstodayhry @newstodayhry



