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ब्राह्मण सभा में अनुशासनहीनता और बदसलूकी के आरोप, सुरेन्द्र शर्मा बड़ौता ने की निष्पक्ष जांच की मांग II

ब्राह्मण सभा में अनुशासनहीनता और बदसलूकी के आरोप, सुरेन्द्र शर्मा बड़ौता ने की निष्पक्ष जांच की मांग II

करनाल-(सुभाष गुप्ता):- सभा में अनुशासनहीनता, अभद्र व्यवहार और तथ्य विकृति की स्थिति की जा रही उत्पन्न : सुरेन्द्र शर्मा बड़ौता करनाल, सुभाष चंद ब्राह्मण सभा हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा बड़ौता ने मंगलवार को ब्राह्मण धर्मशाला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान दो समिति सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सभा में अनुशासनहीनता, अभद्र व्यवहार और तथ्य विकृति की स्थिति उत्पन्न की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह घटना 27 जुलाई की रात उस समय घटी जब वे सभा कार्यालय में फोन पर बातचीत कर रहे थे। तभी कमेटी के एक सदस्य ने उनके साथ अशोभनीय भाषा में बातचीत की और आक्रामक रवैया अपनाया। बड़ौता के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद है, जो उनके पक्ष को स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है।

हाथापाई और रिवॉल्वर छीनने का प्रयास – फुटेज में पूरी घटना कैद:-

बड़ौता ने बताया कि जब वे अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर को किसी भी अनहोनी से बचने के लिए गाड़ी में रखने जा रहे थे, तब कमेटी सदस्य लाजपत राय और मांगेराम ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और रिवॉल्वर छीनने का प्रयास किया। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके बाद तथ्यों को तोड़-मरोड़कर, जानबूझकर गलत विवरण मीडिया व समाज के सामने प्रस्तुत किया गया। 40 वर्षों की सेवा और समाज का विश्वास प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि वे पिछले 40 वर्षों से समाज सेवा में संलग्न हैं और पांच बार ब्राह्मण सभा के प्रधान पद पर निर्वाचित होकर सेवा कर चुके हैं। समाज ने हमेशा उन पर भरोसा जताया है और वे आज भी पूरी निष्ठा और पारदर्शिता से कार्य कर रहे हैं। कमेटी में मनमानी और समाज विरोधी गतिविधियों के आरोप प्रेस वार्ता में उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में सभा के चुनाव लंबित हैं और एसडीएम द्वारा चार सदस्यीय कमेटी नियुक्त की गई है, जिसमें सुशील गौतम, रामकरन, मांगेराम और लाजपत राय सदस्य हैं। इस समिति का कार्य केवल देखरेख और संचालन तक सीमित है, लेकिन इनमें से दो सदस्य अपने अधिकारों से बाहर जाकर मनमानी और सत्ता प्रदर्शन कर रहे हैं।
बड़ौता ने कहा कि यह वही लोग हैं जिन्होंने 1987 से चली आ रही चाय-भंडारे की परंपरा को बंद कराने का प्रयास किया, जो समाज की आस्था और परंपरा का हिस्सा है। इस मुद्दे को लेकर समाज में एक बैठक भी बुलाई गई थी जिसमें इन सदस्यों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न उठाए गए। प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग अंत में उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट है और अब प्रशासन का दायित्व है कि “दूध का दूध और पानी का पानी” किया जाए, ताकि समाज में भ्रम की स्थिति समाप्त हो और सच्चाई सामने आ सके।। #newstodayhry @newstodayhry

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