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गीता ज्ञान तपस्वियों से भी श्रेष्ठ है निष्काम कर्मयोगी II

गीता ज्ञान तपस्वियों से भी श्रेष्ठ है निष्काम कर्मयोगी II

सकाम कर्म करने वालों से योगी उत्तम है: रघुबीर महाराज

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- प्रभु रामलाल नर सेवा नारायण सेवा योग ट्रस्ट सिरसा भवन नंबर2266, सेक्टर-20, पार्ट-3 में भी कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव पर योग गुरु रघुबीर महाराज ने उपस्थित योग प्रेमियों को अपने सम्बोधन में फरमाया कि योग एक उत्तम विधा है। योग करने वाला साधक कर्म करते हुए मुक्ति को प्राप्त करता है। वह कर्म है, निष्काम कर्म। कर्म करना और फल की इच्छा न करना। आम आदमी भी कर्म तो करता है, लेकिन फल की इच्छा तो पहले ही करता है। फल की इच्छा ही उसके बन्धन व जन्म मरण का कारण बनता है।

रघुबीर महाराज का प्रवचन: निष्काम योग, तप और सच्चे साधक की पहचान:-

श्री कृष्ण भगवान अर्जुन को फरमाते है कि योगी, तपस्वियों से भी श्रेष्ठ है, योगी शास्त्र के ज्ञाताओं से भी श्रेष्ठ है। हे! प्रिय अर्जुन, तुम योगी बनो, अर्थात निष्काम कर्म योगी बनो। रघुबीर महाराज ने आगे फरमाया कि तपस्वी कौन है? तपस्या करने वाले अपने शरीर को नाना प्रकार की तपस्या करके तपाते हैं, जैसे दिसम्बर, जनवरी के महीने में ठंडे पानी में खड़े रहना, गर्मी में मई-जून के महीने में अपने चारों ओर आग जला कर बैठना। कुएं में उल्टे लटकना, जैसे शेख फरीद ने किया। सकाम कर्म करने वालों से योगी उत्तम है।

योगी शास्त्र ज्ञातायों से श्रेष्ठ है:-

बिना स्थान वाला झोपड़ी की इच्छा, झोपड़ी वाला मकान की, मकान वाला महल की इच्छा करता है। योगी शास्त्र ज्ञातायों से श्रेष्ठ है। विद्वान लोग बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं, पर उनमें अमल की कमी होती है। किसी ने सत्य ही फरमाया है, पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भय न कोय। ढाई अक्षर प्रेम के पढ़े सो पंडित होय। ब्रह्ज्ञानी पंडित प्रभु नाम के अभ्यास से होता है। है! अर्जुन पाप-पुण्य का विचार किये बिना निष्काम कर्म योगी बनो। पाप-पुण्य का विचार, अज्ञानी, नासमझ लोग करते हैं। इस मौके पर शक्ति चावला, पृथ्वी बैनीवाल, अरुण चौधरी, भाल सिंह, संजय, नरेश छाबड़ा, लक्ष्य, राज चावला, जमीत, मनजीत, संगीता, किरण, गौरी, सुलोचना आदि भक्त मौजूद थे।। #newstodayhry @newstodayhry

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