Haryana
Trending

भक्ति, प्रेम और समर्पण की प्रतीक: संत शिरोमणि मीराबाई II

भक्ति, प्रेम और समर्पण की प्रतीक: संत शिरोमणि मीराबाई II

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य उपासक, भक्ति, प्रेम, त्याग, समर्पण की प्रतीक संत कवयित्री तथा भक्त शिरोमणि माँ मीरा बाई की अमरभक्ति और प्रेरणादायी काव्य धारा युगों-युगों तक समाज में श्रद्धा, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना प्रकाश का फेलाती रहेगी। ये शब्द लाॅयन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय ध्यान मंदिर में साधकों को मीराबाई की जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभ-कामनाएँ देते हुए कहें। उन्होंने कहा मीराबाई का जीवन भक्ति, प्रेम और त्यागका अद्वितीय प्रतीक हैं तथा सांसारिक बंधनों से परे होकर अपने आराध्य श्रीकृष्ण के प्रति अटूट समर्पण और प्रेम का संदेश दिया।

श्री साहुवाला ने कहा:-

मीराबाई के भजनों की अमृतधारा आज भी भक्तों के हृदयों में ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण की ज्योति प्रज्वलित करती हैं। उन्होंने कहा मीराबाई ने अपने जीवन को पूरी तरह श्रीकृष्ण-भक्ति में समर्पित कर दिया था तथा उनके पद और भजन आज भी लोगों के हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम और विश्वास की भावना जागृत करते हैं। उन्होंने कहा कृष्ण काव्य में माधुर्य भक्ति की अद्वितीय प्रतीक, अपनी अलौकिक भक्ति भावना एवं काव्य माधुर्य से अमर स्थान प्राप्त करने वाली राजस्थान की पुण्य धरा पर जन्म लेकर कृष्ण भक्ति के रस से मानव मन को सराबोर करने वाली मीराबाई को आज याद करके सभी का मन खुशियों से भर गया और बचपन में किताबों में उनके दोहें को पढ़ते थें वो सब आज याद आने लगें।

श्री साहुवाला ने कहा:-

मीराबाई भक्ति-काल की एक ऐसी संत हैं, जिनका सबकुछ कृष्ण के लिए समर्पित था तथा उनका कृष्ण प्रेम ऐसा था कि वह उन्हें अपना पति मान बैठी थी तथा भक्ति की ऐसी चरम अवस्था कम ही देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा मीरा कृष्ण के प्रेम में ऐसी दीवानी थी कि वह एक गाँव से दूसरें गाँव में नाचती जाती तथा भगवान श्रीकृष्ण के ही गीत गाती रहती थी। उन्होंने कहा मीराबाई से हमें यह सीख मिलती है कि भक्ति जागरूकता और प्रेम के साथ करनी चाहिए तथा भक्ति इस अस्तित्व में होने का सबसे खूबसूरत तरीका हैं तथा ऐसा कहा जाता है कि दर्शकों की पूरी भीड़ के सामने मीरा द्वारकाधीश की मूर्ति में समा गई। इस अवसर पर सुनीता, संदीप, ममता, सोनम, रजनी, केवल, कृष्ण, त्रिलोक, अशोक, जीवन अपस्थित थें।। #newstodayhry @newstodayhry

Related Articles

Back to top button