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गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर मानवता, भाईचारे और सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान II

गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर मानवता, भाईचारे और सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान II

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- विश्व को शांति, सद्भाव, भाईचारा, प्रेम और सेवा का संदेश देने वाले महान संत, दार्शनिक एवं सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर सभी देशवासियों को बधाई देते हुए लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने कहा कि गुरु नानक देव अपने व्यक्तित्व में योगी, गृहस्थ, धर्म सुधारक, समाज सुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु के गुण समेटे हुए थे और वे हमेशा ही आध्यात्मिक मिलन एवं सत्संग में व्यतीत रहते थे। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी की आत्मा  सांसारिक दुःखों को देखकर कांपती थी। जब उन्हें बचाने वाला कोई दृष्टिगत नहीं होता था तो वे दुःख नाषक प्रभु को ही स्मरण करते थे और उनकी कृपा में ही रहते थे।

श्री साहुवाला ने कहा कि:-

हमारा मालिक – प्रभु हमेशा ही हम पर कृपा करता रहता हैं और उनकी निरंतर कृपा से ही हमारी समस्याओं का समाधान हो जाता हैं इसलिए हमें प्रतिदिन उस मालिक को ही सिमरन करना चाहिए क्योंकि वहीं हमें दुःखों से बचाता हैं और उसी के नाम के द्वारा ही हम इस संसार रूपी समुद्र से पार उतर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता स्वरूप प्रभु ही सर्वत्र मौजूद हैं उसके अतिरिक्त कोई दूसरा इस संसार में मौजूद नहीं हैं जिस चीज पर वह कृपा दृश्टि करता हैं, वहीं उसका स्मरण करता हैं इसलिए हमें परमात्मा से यही वरदान मांगना चाहिए कि मैं तुम्हारे नाम में तल्लीन रहूं क्योंकि हम उसी के सेवक हैं। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी जनता को जगाने के लिए और धर्म प्रचारकों को उनकी खामिया बताने के लिए अनेक तीर्थ स्थानों पर पहुंचे और लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने का आग्रह किया और उन्होंने पितरों को भोजन यानि मरने के बाद करवाए जाने वाले भोजन का विरोध किया और कहा कि मरने के बाद दिया जाने वाला भोजन पितरों को नहीं मिलता। इसलिए हमें इसकी बजाए जीते जी मां-बाप की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को याद करके, उनके सत्य, समानता और निस्वार्थ सेवा के संदेशों को फैलाने और एक समुदाय के रूप में एकजुट होने में निहित हैं तथा यह त्यौहार निःस्वार्थ सेवा के महत्व को रेखांकित करता हैं जो गुरु नानक देव जी के उपदेशों का एक मुख्य स्तम्भ हैं।

श्री साहुवाला ने कहा कि:-

गुरु नानक देव जी की सबसे प्रसिद्ध शिक्षाओं में से एक यह हैं कि ईश्वर एक ही हैं और सभी मनुष्य ईश्वर तक सीधा पहुंच सकते हैं तथा जाति प्रथा का खंडन किया। उन्होंने  किरत करो और वंड छकों पर जोर दिया यानी बिना किसी षोशण या धोखाधड़ी के ईमानदारी से जीविकाउपार्जन करों और दूसरों के साथ बांटकर खाओं और जरूरतमंदों की मदद करों ताकि तुम दोेनो साथ मिलकर खा सकों जैसे विचारों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि यह पर्व भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का प्रतीक हें जो मानवता को प्रेम और सेवा का मार्ग दिखाता हैं तथा सभी मनुश्यों के साथ समानता का व्यवहार करना और निःस्वार्थ सेवा करने को अपने जीवन में उतारने का अवसर भी हैं। श्री साहुवाला ने कहा कि इस दिन भक्त पूरे विष्व में कीर्तन, भजन और विषेश धार्मिक सभाओं का आयोजन करते हैं तथा इस दिन गुरूद्वारों में लंगर और सेवा के कार्यक्रम होते हैं और यह पर्व श्रद्धा, सामूहिक भावना तथा सेवा भाव से मनाया जाता हैं। उन्होंने कहा कि गुरु नानक जी की शिक्षाएं आज भी मानवता के लिए प्रेरणादायक हैं ओर हमें सच्चाई, प्रेम और भाईचारे के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि गुरु नानक जयंती भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में जैसे कि यूनाइटेड किंगडम (संयुक्त राज्य अमेरिका) और कनाडा जैसे देशों में बनाई जाती हैं। इस दिन वे विशेष प्रार्थना करने और गुरु नानक देव जी की महान् शिक्षाओं का अनुसरण करने अपने निकटतम गुरुद्वारे में जाते हैं और आर्शीवाद लेकर अपने आप को धन्य समझते हैं।। #newstodayhry @newstodayhry

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