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मवई विकासखंड की अनदेखी आज़ादी के 75 साल बाद भी तरसते हैं बुनियादी सुविधाओं के लिए II

मवई विकासखंड की अनदेखी आज़ादी के 75 साल बाद भी तरसते हैं बुनियादी सुविधाओं के लिए II

आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है:-

मंडला-(कविंद्र पटेल):- मवई विकासखंड की उपेक्षा से परेशान ग्रामीण तरस रहे हैं बुनियादी सुविधाओं के लिए मंडला जिले का मवई विकासखंड आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। बीते दो दशकों में कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन गांवों की हालत जस की तस बनी हुई है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और शुद्ध पेयजल जैसी आवश्यक सेवाएं आज भी आम ग्रामीण की पहुँच से कोसों दूर हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था — नाम मात्र की सेवा:-

मवई का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। महिला डॉक्टर तो दूर, यहां नियमित डॉक्टर और स्टाफ तक नहीं हैं। गांवों में बने उप-स्वास्थ्य केंद्र भी केवल भवन बनकर रह गए हैं। एक्स-रे मशीन उपलब्ध है, लेकिन ऑपरेटर नहीं है। छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए ग्रामीणों को 100 किलोमीटर दूर मंडला जाना पड़ता है, जो गरीब तबके के लिए एक बड़ी चुनौती है।

शिक्षा— भविष्य अंधकार में:-

शिक्षा व्यवस्था की हालत भी चिंताजनक है। प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। मॉडल और नॉर्मल स्कूलों में भी पर्याप्त स्टाफ नहीं है। निजी शिक्षा संस्थान ना के बराबर हैं, जिससे गरीब बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ रहा है।
रोजगार पलायन मजबूरी बन गया है मनरेगा जैसे योजनाओं की स्थिति बेहद खराब है। पंचायतों को मिलने वाला बजट इतना कम है कि साल भर में केवल एक-दो छोटे कार्य ही हो पाते हैं। रोजगार के अवसरों की कमी से युवा दूसरे शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। निर्माण कार्यों में ठेकेदारों और जनपद पंचायत की मिलीभगत से घटिया गुणवत्ता का काम होता है, जिससे विकास की गति थम जाती है।

जल जीवन मिशन — अधूरी योजनाएं, अधूरा पानी:-

जल जीवन मिशन के तहत कई पंचायतों में पाइपलाइन और पानी की टंकियां तो बन गई हैं, लेकिन आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है। ठेकेदारों ने अधूरा काम पंचायत को हैंडओवर कर दिया है, लेकिन पंचायत के पास न तकनीकी स्टाफ है, न संचालन के लिए बजट। योजनाएं बहुत हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं I

सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं :-

जैसे 5 किलो मुफ्त राशन, लाडली बहना योजना, किसान सम्मान निधि — गरीबों के लिए राहत जरूर हैं, लेकिन ये स्थायी समाधान नहीं हैं। जब तक गांवों में बेहतर शिक्षा, मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं और स्थानीय रोजगार उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक ग्रामीण विकास सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा। मवई जैसे वनांचल क्षेत्रों की अनदेखी अब बर्दाश्त के बाहर है। यह समय है कि सरकार इस क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को समझे और इनके समाधान के लिए ठोस और दीर्घकालिक योजनाएं बनाए। वरना “विकास” केवल नारों और घोषणाओं तक ही सिमट कर रह जाएगा।। #newstodayhry @newstodayhry

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