आईटीआई मे छात्राओं द्वारा बाल श्रम के खिलाफ निकाली गई जागरूकता रैली को हरी झंड़ी दिखाकर शुरुआत की।।
आईटीआई मे छात्राओं द्वारा बाल श्रम के खिलाफ निकाली गई जागरूकता रैली को हरी झंड़ी दिखाकर शुरुआत की।।


पानीपत-(अरुण मित्तल):- समालखा शहर के वार्ड छः मे जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी वर्षा शर्मा ने बृहस्पतिवार को महिला आईटीआई मे छात्राओं द्वारा बाल श्रम के खिलाफ निकाली गई जागरूकता रैली को हरी झंड़ी दिखाकर शुरुआत की। छात्राओं ने जोशीले नारों और पोस्टरों के माध्यम से बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता फैलाई। इससे पहले विश्व बाल मजदूरी दिवस के अवसर पर आईटीआई मे बाल श्रम के खिलाफ एक जागरूकता शिविर को बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए पानीपत की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी वर्षा शर्मा ने कहा कि बाल मजदूरी करवाना एक अनैतिक कृत्य ही नहीं बल्कि कानूनन अपराध भी है। बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता शिविर का आयोजन हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार गैर सरकारी संस्था एमडीडी ऑफ इंडिया और मानव तस्करी विरोधी इकाई के सहयोग से किया गया। जागरूकता शिविर मे छात्राओं को संबोधित उन्होने कहा कि देश में बाल श्रम एक गंभीर समस्या है और गरीबी या अन्य कारणों की वजह से बहुत सारे बच्चे इस अभिशाप के चंगुल में फंसे हुए हैं। बच्चों से बाल श्रम करवाने वाले सस्ते श्रम के लालच में उनका शोषण करते हैं और उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हैं। उन्होने बताया कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह की मजदूरी और 14 से 18 साल तक के बच्चों से किसी भी खतरनाक परिस्थितियों वाली जगह पर काम कराना कानूनन जुर्म है और अपराधी को दो साल तक की सजा और जुर्माना किया जा सकता है। ऐसे किसी भी केस की सूचना तुरंत विभाग या हेल्पलाइन नंबर्स पर दें। ऐसे हर केस में पैनल एडवोकेट्स और पैरा लीगल वालंटियर द्वारा उन्हें मानसिक, भावनात्मक, कानूनी परामर्श और पुलिस व चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है। मानव तस्करी विरोधी इकाई से उप निरीक्षक संदीप ने कहा कि लड़कियों को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि बहुत सारे असामाजिक तत्व लड़कियों को बहला फुसला कर उन्हें मानव तस्करी कर यौन अपराधों में धकेल देते हैं। पानीपत में बाल श्रम और बाल तस्करी एक बड़ा ही गंभीर मुद्दा है। इसलिए हमें इसके खिलाफ कठोर कारवाई और चौकसी से काम करना चाहिए। जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रन के सहयोगी गैर सरकारी संस्था एमडीडी आफ इंडिया के जिला समन्वयक संजय कुमार ने छात्राओं को जागरूक करते हुए बताया कि पिछले साल एमडीडी ऑफ इंडिया के सहयोग से मानव तस्करी विरोधी इकाई द्वारा 232 बच्चों को बाल श्रम और जबरन भिक्षावृत्ति से मुक्त करवाकर बाल कल्याण समिति में पेश किया। उन्होने बताया कि पढ़ने लिखने की उम्र में यह बच्चे दुकानों, ढाबों, रेहड़ियों पर काम करने, बर्तन धोने और भीख मांगने को मजबूर थे। इनमें से बहुत सारे बच्चों को स्कूल में दाखिला करवाकर शिक्षा के लिए प्रेरित किया गया। प्राधिकरण द्वारा बच्चों को और लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार कैंप लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा समालखा सामान्य अस्पताल से एडोलसेंट काउंसलर सुमन वर्मा ने भी लड़कियों को उनके अधिकारों और सामाजिक स्थिति से अवगत कराया। राजकीय महिला आईटीआई की प्रिंसिपल रंजना शर्मा ने कहा कि बच्चों को इस तरह से कानूनी जानकारी प्रदान करना बेहद जरूरी है तभी उनको सशक्त बनाया जा सकता है। बच्चों के लिए ऐसे जागरूकता शिविर आयोजित करना समय की मांग है और समय समय पर ऐसे कैंप लगते रहने चाहिए। इस मौके पर नीलम मलिक जीआई, नरेश कौर, निशा शर्मा, आशा, नरेश कुमार, सचिन और 70 से ज्यादा छात्राएं उपस्थित रहीं।। #newstodayhry @newstodayhry



