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छछरौली में पुल की आस अधूरी: बरसात में जान जोखिम में डाल नदी पार करते बच्चे II

छछरौली में पुल की आस अधूरी: बरसात में जान जोखिम में डाल नदी पार करते बच्चे II

यमुनानगर-(मनदीप कौर):- छछरौली के लगभग आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों को बरसात के सीजन में जान जोखिम में डाल नदी पार कर स्कूल व अन्य जरूरी सामान लेने के लिए जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो दशक से नदी पर पुल बनाने की मांग जनता के बीच आने वाले जनप्रतिनिधियों के बीच रखी जाती है। जनप्रतिनिधियों द्वारा हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है।बरसात के सीजन में ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के साथ लगती पथराला नदी में बरसात के सीजन में पानी आता रहता है। जिसको लेकर नदी पार करते समय पहले भी कई बार हादसे हो चुके हैं। इस बार समस्या और भी गंभीर रूप ले चुकी है। क्योंकि नदी के पार बसे गांव में स्कूलों में अध्यापक नहीं है और इन गांवों के बच्चे नदी पार कर दूसरे गांव के स्कूलों में पढ़ने के लिए जाते हैं। छोटे बच्चे नदी से निकलकर स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में डर सताता रहता है कि नदी पार करते समय बच्चों का पांव गहरे गड्ढे में ना चला जाए और जिससे कोई बड़ी अनहोनी ना हो जाए। ग्रामीणों का कहना है कि हरियाणा एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां पर अभी भी लोग बाकी लोगों से 20 साल पीछे की जिंदगी जी रहे हैं। क्योंकि यहां पर सरकार ने हमेशा अनदेखी की है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां देश में बड़े-बड़े हाईवे फ्लाईओवर सड़कें बन रही हैं तो नगला, नगली, मोहिउद्दीनपुर व राजपुर यह ऐसे गांव हैं जहां पर आज तक नदी का एक पुल भी नहीं लगा है। ग्रामीण इसका सीधा दोष जनप्रतिनिधियों को देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि वोट लेने के समय यहां पर आते हैं और सबसे पहले सड़क पुल बनाने का आश्वासन भोले भाले लोगों को देकर वोट लेकर उसके बाद यहां पर किसी का हाल-चाल जानने भी नहीं आते हैं। पिछले दो दशक से क्षेत्र के लोग सड़क और पुल की मांग कर रहे हैं पर आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसकी तरफ ध्यान तक नहीं दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो दशक से ग्रामीण नदी पर पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं। जनप्रतिनिधि वोट लेने के समय तो यहां पर सभी बातें करते हैं पर जब समय निकल जाता है तो उसके बाद यहां पर कोई ग्रामीणों की समस्या जानने के लिए भी नहीं आता है। बरसात के सीजन में तो हालात इतने बद्तर हो जाते हैं कि गांव के कब्रिस्तान व श्मशान घाट नदी के पार हैं। अर्थी को लेकर नदी के पानी से होकर जाना पड़ता है। घाड क्षेत्र के इन गांवों के साथ सभी ने हमेशा भेदभाव किया है। इस क्षेत्र की तरफ सरकारों का कभी ध्यान ही नहीं गया है। ग्रामीण इकराम ने बताया कि इन गांव की सबसे बड़ी समस्या नदी पर पुल ना होना है। आम आदमी तो जैसे कैसे नदी के पानी से निकलकर चला ही जाता है अब हमारे बच्चे स्कूल में स्टाफ न होने की वजह से नदी पार के दूसरे गांव में पढ़ने के लिए जाते हैं। जब बच्चे नदी पार करते हैं तो वह पानी से होकर 3 महीने स्कूल जाते हैं। हर समय डर लगा रहता है कि कोई अनहोनी ना हो जाए हमारी मजबूरी है स्कूल में बच्चों की पढ़ाई के लिए अध्यापक नहीं है दूसरे गांव में बच्चों को भेजते हैं तो नदी पार करके जाना पड़ता है।। #newstodayhry @newstodayhry

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