शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को किया गया सम्मानित : स्वामी साहुवाला
शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को किया गया सम्मानित : स्वामी साहुवाला


एक गुरू ही शिष्य में अच्छे चरित्र का निर्माण कर सकता हैं :-
सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- किताबी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों व संस्कार रूपी शिक्षा के माध्यम से एक गुरू ही शिष्य में अच्छे चरित्र का निर्माण कर सकता हैं तथा जिस समाज में रहना हैं, उसके योग्य हमें केवल शिक्षक ही बनाते हैं। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय कोर्ट कालोनी में क्लब द्वारा आयोजित शिक्षक दिवस पर बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षक उस कुम्हार की तरह हैं जो अपने छात्र रूपी घड़े की कमियों को दूर करने के लिए भीतर से हाथ का सहारा देकर बाहर से थापी से चोट करता हैं वैसे ही शिक्षक भी कभी-कभी छात्रों पर क्रोध करके उसके चरित्र का निर्माण तथा उन्हें बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इसलिए शिक्षक एवं शिक्षक दिवस का महत्व भारतीय संस्कृति में बहुत ज्यादा हैं:-
उन्होंने कहा कि अध्यापक जहां बच्चों को शिक्षा देते हैं वहीं उनका भविष्य भी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के युग में बच्चों के विकास के लिए अध्यापक का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है और हमें अध्यापक को भी पूरा सम्मान देना चाहिए। शिक्षक दिवस का दिन हमें अपने अध्यापकों के प्रति सम्मान व आभार व्यक्त करने का दिन हैं तथा शिक्षक ही हमारे जीवन में अज्ञानता के अंधकार को दूर कर उसे ज्ञान के प्रकाष से भरते हैं।
उन्होंने कहा कि:-
शिक्षक सिर्फ हमें पढ़ाते ही नहीं बल्कि वे हमें हमारे भविश्य को आकार भी देते हैं और हमें जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। वे न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं बल्कि हमारे भीतर जिज्ञासा और रचनात्मकता की लौ भी जलाते हंै। उन्होंने कहा शिक्षक दिवस छात्रों के लिए विशेष महत्व रखता हैं क्योंकि यह उन गुरुओं का सम्मान करता हैं जिन्होंने अपने समर्पण और ज्ञान के माध्यम से अनगिनत लोगों के जीवन को आकार दिया हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे की मां ही उसकी प्रथम शिक्षक होती हैं और:-
घर ही उसका स्कूल होता हैं और उसे नैतिक मूल्य तथा उसके व्यक्तित्व की सबसे मजबूत बुनियाद भी घर से होती हैं। इसलिए माॅं को चाहिए कि वह बच्चे की शिक्षक की भूमिका भी निभाएं। उन्होंने कहा कि षिक्षक बच्चे का गुरू और मार्गदर्षक ही नहीं होता बल्कि उसका अच्छा दोस्त भी होता हैं इसलिए वह बच्चों के प्रति हमेशा सकारात्मक रूख रखें। इस अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष रमन छाबड़ा गणित अध्यापक राजकीय उच्च विद्दालय, किराड़कोट खण्ड बडागुढ़ा सिरसा ने कहा कि आज के इस कम्प्यूटर युग में अध्यापक की जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ गई हैं। आज अध्यापक अपनी जिम्मेवारी बहुत बखूबी जानता हैं और वह अपनी तरफ से पूरी मेहनत करता हैं।
उन्होंने कहा कि:-
आज देश के अंदर हमारे शिक्षक 15 कि.मी. तक पैदल चलकर बच्चों को पढ़ाने के लिए जाते हैं वहीं वे 25 कि.मी. साइकिल पर चलकर बच्चों को शिक्षा देने पहुंचते हैं जिसके लिए शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को इतनी कठोर मेहनत करने के लिए मैं उनको बधाई देता हूॅं। उन्ही की वजह से आज देश में शिक्षा का अलख जगा रहा हैं तथा देश में उच्च स्तर की शिक्षा हो रही हैं और आज हमारा देश तेजी से सफलता के मार्ग पर अग्रसर हैं जिसका श्रेय हमारे शिक्षकों को ही जाता हैं। इस अवसर पर नरेश कुमार ग्रोवर प्रवक्ता अंग्रेजी राजकीय मॉडल सिनियर सैकेण्डरी स्कूल बप्प सिरसा ने बताया कि भारत में शिक्षक दिवस 5 सितम्बर को मनाया जाता हैं जिसकी परंपरा सन् 1962 में शुरू हुई जब देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृश्ण ने जन्मदिन बनाने के लिए अपने छात्रों को स्वीकृति प्रदान की थी।
उन्होंने कहा कि:-
डा. राधा कृश्ण ने 40 वर्श तक एक शिक्षक के रूप में कार्य किया था और आज मुझे भी 21 वर्श हो गए हैं और मै लायन्स क्बल सिरसा अमर का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने शिक्षक दिवस पर मुझे यहां आकर सम्मानित किया हैं तथा मैं कामना करता हूँ कि क्लब इसी तरह समाज-सेवी कार्य करती रहें और जरूरतमंदों की सहायता करती रहें। इस अवसर पर रमन छाबड़ा, नरेष कुमार, रितुन साहुवाला, राहुल, विजय गोयल, संदीप कुमार, पायल सेतिया, रीना साहुवाला एवं अन्य उपस्थित थे। अंत में रमन छाबड़ा एवं नरेष कुमार को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।। #newstodayhry @newstodayhry



