भारत छोड़ो आंदोलन ने जगाया आजादी का संकल्प, 1947 की स्वतंत्रता की बनी मजबूत नींव :- स्वामी रमेश साहुवाला ll
भारत छोड़ो आंदोलन ने जगाया आजादी का संकल्प, 1947 की स्वतंत्रता की बनी मजबूत नींव :- स्वामी रमेश साहुवाला ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आखिरी बड़ी लड़ाई थी जो केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह भारतीय जनता के आत्मसम्मान और संकल्प का प्रतीक था। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय कोर्ट कालोनी में भारत छोड़ो आंदोलन दिवस पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम कई आंदोलनों से भरा है, लेकिन 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन सबसे निर्णायक और जनव्यापी आंदोलन था। इसे अगस्त क्रांति और अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन के नाम से जाना जाता है। यह वह समय था जब द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था और भारतीय जनता ने अंग्रेजो से अब और इंतजार न करने का फैसला कर लिया था।
श्री साहुवाला ने कहा कि 1942 तक भारत में असंतोष चरम पर था तथा द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों ने भारत को बिना पूछे युद्ध में झोंक दिया जिसके बाद महंगाई, भुखमरी और बेरोजगारी बढ़ गई थी। इसके बाद क्रिप्स मिशन के असफल होने के बाद कांगे्रस का धैर्य टूट गया और गांधी जी को लगा कि अब करो या मरो का समय आ गया है। फिर 14 जुलाई 1942 को कांग्रेस कार्य समिति की वर्धा बैठक में प्रस्ताव पास हुआ और 8 अगस्त 1942 को मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी क बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया।
उन्होंने बताया कि इस आंदोलन की कुछ प्रमुख विशेषताएं थी जिनमें जन भागीदारी के अंतर्गत किसान, मजदूर, महिलाएं, सरकारी कर्मचारी सभी सड़कों पर उतर आए और स्कूल-काॅलेज सब बंद हो गए। इसके प्शचात् पूरे देश में हड़तालें हुई, रेल की पटरियां उखाड़ी गई, तार काटे गए एवं सरकारी इमारतों पर तिरंगा फहराया गया। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर जनता ने अपनी सरकारें भी बना ली जिनमें बलिया, तामलुक और सतारा के समानंतर सरकारें प्रसिद्ध थी जो कि कई महीनों तक चली। इस आंदोलन में भूमिगत होकर भी आंदोलन चलाते रहे।
उन्होंने कहा कि अंग्रेज सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए पूरी ताकत झोंक दी, लाठीचार्ज, गोलीबारी, सामूहिक गिरफ्तारी और जेलें आम हो गई जिनमें लगभग एक लाख से भी ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए और कई लोगों ने अपनी जान भी दे दी लेकिन जनता का जोश फिर भी कम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तुरन्त सफल नहीं हुआ लेकिन इसका असर बहुत गहरा था। इस आंदोलन ने दिखा दिया कि भारतीय किसी भी कीमत पर आजादी चाहते है और अब समझौता नहीं होगा और इसी के 5 साल बाद भारत 1947 में आजाद हुआ। @newstodayhry #newstodayhry




