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तुलसीदास जी की रचनाओं ने भक्ति आंदोलन को दी नई ऊंचाई:- स्वामी रमेश साहुवाला ll

तुलसीदास जी की रचनाओं ने भक्ति आंदोलन को दी नई ऊंचाई:- स्वामी रमेश साहुवाला ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-भारतीय भक्ति साहित्य के आकाश में गोस्वामी तुलसीदास का नाम सबसे चमकते सितारों में से एक है। वे महान् कवि, रामभक्त, समाज सुधारक, लोक भाषा के निर्माता, महान् देशभक्त, विचारक एवं अलौकिक काव्य शक्ति सम्पन्न कवि थे जिन्होंने अपनी देव निर्मित तुलिका से राम चरित मानस व हनुमान चालिसा जैसे अद्वितीय काव्य कर रचना की, जो भारतीय धर्म, दर्शन, साहित्य एवं भक्ति का अमर काव्य है। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय मारूति मन्दिर में लायन्स क्लब सिरसा अमर द्वारा आयोजित तुलसी दास जयन्ती के उपलक्ष्य में गीत-संगीत प्रतियोगिता में बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वे मध्ययुगीन भारतीय साहित्यप्रकाश के उज्जवलतम रतन है जो एक आदर्श महात्मा एवं महानतम् विद्वान थे तथा अद्वितीय काव्य कौशल के धनी थे तथा उनके जैसे प्रतिभशाली कलाकार के हाथों निर्मित होकर राम काव्य अपनी उन्नति की चरम सीमा पर पहुंच गया था जो एक अनुपम निधी है, अनन्त भाव राशि से ओत-प्रोत है। श्री साहुवाला ने कहा कि जीवनकाल में ही तुलसीदास अपनी भक्ति और ज्ञान के लिए सारे देश में प्रसिद्ध हो चुके थे जिनके दर्शन करने के लिए अनेक साधु, संत और विद्वान आया करते थे। उन्होंने कहा वो एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने जन्म लेते ही अपने मुख से राम के नाम का उच्चारण किया तथा उनके मुख में जन्म से ही पूरे दांत थे तब उनके पिता ने उन्हें राक्षस समझ कर त्याग दिया था जो आगे चलकर अपनी अनुभवशीलता, शास्त्र ज्ञान तथा राम कृपा के बल पर ऐसी दिव्य साहित्य का निर्माण किया जिसने मृतप्रायः हिन्दू जाति में नवजीवन का संचार किया। उन्होंने कहा कि वे एक और हृदय में पावन भावों का संचार करते है तो दूसरी और जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान भी करते हैं जिनके काव्यों को पढ़कर जीवन की असंख्य बाधाओं को झेलते हुए कर्म पथ पर आगे बढ़ने का उत्साह मिलता है। उन्होनंे कहा कि तुलसीदास जी का मुख्य संदेश राम नाम सत्य है। उन्होंने भक्ति के लिए जाति, बड़ा ज्ञान या धन जरूरी नहीं, सिर्फ सच्चा भाव चाहिए। उन्होंने अपने युग में फैले आडंबर, पाखंड और उंच-नीच का विरोध किया। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी की रचनाओं ने भक्ति आंदोलन को नई उंचाई दी तथा रामचरितमानस के कारण रामलीला, कीर्तन, प्रवचन और सुंदरकांड का पाठ लोक संस्कृति का हिस्सा बन गया और उनकी भाषा इतनी सरल और मधुर है कि गाॅंव का बच्चा भी मंगल भवन अमंगल हारी गुनगुनाने लगता है। उन्होेंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने सन् 1623 में काशी में शरीर त्याग किया, पर वे अपने शब्दों में आज भी जीवित है तथा उन्होंने हमें सिखाया हैं कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं है, समाज को जोड़ने और उसे उॅंचा उठाने का साधन भी है। इससे पूर्व दीपा मैडम ने मुख्यातिथी स्वामी रमेश साहुवाला का स्वागत किया तथा उन्होंने बताया कि गीत-संगीत प्रतियोगिता में प्रथम आने पर मधु को, द्वितीय मुस्कान व तृतीय पूजा को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर अलीषा, गुरविन्द्र कौर, शुक्ला, नीलम, सुमन, प्रीति, काजल, पारूल, रीना, रजनी, सोनम, रचना उपस्थित थे। @newstodayhry #newstodayhry

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