डबवाली पुलिस का ‘साइबर राहगीरी’ अभियान, लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए किया जागरूक ll
डबवाली पुलिस का ‘साइबर राहगीरी’ अभियान, लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए किया जागरूक ll

डबवाली-(पंकज गोदारा):-पुलिस अधीक्षक जसलीन कौर, आईपीएस के दिशा-निर्देशन में डबवाली पुलिस द्वारा हर माह के प्रथम बुधवार को आयोजित किए जाने वाले ‘साइबर राहगीरी’ कार्यक्रम के तहत आज साइबर अपराधों के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान साइबर अपराध शाखा डबवाली, थाना एवं चौकी पुलिस की टीमों ने शिक्षण संस्थानों, गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों तथा सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय बताए।
पुलिस प्रवक्ता एवं साइबर अपराध शाखा डबवाली प्रभारी उप निरीक्षक आनन्द कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में इंटरनेट, ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही साइबर अपराधी भी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय सतर्कता, जागरूकता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार है। इसी उद्देश्य से ‘साइबर राहगीरी’ के माध्यम से पुलिस लगातार आमजन तक पहुंचकर साइबर सुरक्षा का संदेश दे रही है।
उन्होंने बताया कि डबवाली पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इन जागरूकता अभियानों को प्रमुख उद्देश्य है कि आमजन को साइबर अपराधों व उनसे बचाव के तरीकों से अवगत करवाया जा सके । इसके लिए डबवाली पुलिस की टीमें शिक्षण संस्थानों, गांवों, नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से जन जन तक पहुंचकर उन्हें साइबर अपराधियों के बुरे इरादों से सतर्क किया जा सके । जिससे आमजन जागरूक व सतर्क होकर सोशल मीडिया व बैंकिंग संबंधी कार्य करें । ताकि वे साइबर अपराधियों के चंगुल में ना फसें और उन्हें शिकायत करने के लिए पुलिस तक जाने की आवश्यकता ना पड़े ।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को सुरक्षित ऑनलाइन गेमिंग, साइबर बुलिंग, सोशल मीडिया सुरक्षा, फर्जी लिंक एवं एपीके फाइलों से बचने तथा इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग करने के बारे में जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, फाइल या संदेश को बिना जांचे खोलने से बचें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया या अनजान लोगों के साथ साझा न करें।
अभिभावकों एवं शिक्षकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर सकारात्मक निगरानी रखने तथा बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल गतिविधियों को लेकर संतुलित एवं सुरक्षित आदतें विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही बच्चों को साइबर ठगी, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और ऑनलाइन संपर्कों के संभावित खतरों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।
वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी, फर्जी पुलिस/सीबीआई/ईडी/कस्टम अधिकारी बनकर किए जाने वाले कॉल, ओटीपी/केवाईसी फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर तथा डर या दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाने वाले साइबर अपराधों से सावधान किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी के नाम पर फोन करके डराने या तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाए तो बिना सत्यापन कोई आर्थिक लेन-देन न करें।महिलाओं एवं बालिकाओं को साइबर स्टॉकिंग, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, मॉर्फ्ड/डीपफेक फोटो-वीडियो, ऑनलाइन उत्पीड़न तथा सोशल मीडिया पर गोपनीयता व सुरक्षा के संबंध में जागरूक किया गया। पुलिस टीमों ने बताया कि सोशल मीडिया अकाउंट की गोपनीयता सेटिंग मजबूत रखना और अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क करते समय सावधानी बरतना साइबर अपराधों से बचाव में महत्वपूर्ण है।इसी प्रकार व्यापारियों एवं दुकानदारों को यूपीआई/क्यूआर कोड फ्रॉड, फर्जी पेमेंट स्क्रीन शॉट और फर्जी कस्टमर केयर के माध्यम से होने वाली ठगी के प्रति सचेत किया गया। पुलिस ने समझाया कि केवल स्क्रीनशॉट देखकर भुगतान प्राप्त होने की पुष्टि न करें, बल्कि अपने बैंक खाते में वास्तविक राशि जमा होने की पुष्टि के बाद ही सामान या सेवा उपलब्ध कराएं।
गांवों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित नुक्कड़ सभाओं के दौरान ग्रामीणों को फर्जी कॉल एवं संदेश, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, सोशल मीडिया फ्रॉड तथा साइबर अपराध की तत्काल रिपोर्ट करने के संबंध में जानकारी दी गई। वहीं सरकारी कर्मचारियों को Phishing, संदिग्ध लिंक/Attachment/APK, बॉस स्कैम एवं अधिकारियों के नाम से भेजे जाने वाले फर्जी संदेश तथा सरकारी खातों और डेटा की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
उप निरीक्षक आनन्द कुमार ने कहा कि साइबर अपराधी आपके डर, जल्दबाजी, लालच व विश्वास को अपना हथियार बनाते हैं, लेकिन जागरूक व सतर्क नागरिक उनकी सबसे बड़ी चुनौती हैं। कोई भी बैंक, सरकारी विभाग या विश्वसनीय संस्था फोन पर ओटीपी, पिन, पासवर्ड, सीवीवी या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए नहीं कहती। इसलिए किसी भी अनजान कॉल, लिंक, ऐप, QR Code अथवा ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना बेहद जरूरी है।
उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि डिजिटल सुविधा का लाभ उठाएं, लेकिन सावधानी के साथ। साइबर अपराध होने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें, ताकि समय रहते नुकसान को रोका जा सके। इसके अलावा साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर शिकायत दर्ज करवाएं तथा संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचना दें ।उन्होंने कहा कि डबवाली पुलिस का ‘साइबर राहगीरी’ अभियान केवल एक दिन की गतिविधि नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर जागरूकता प्रयास है।@newstodayhry #newstodayhry




