संवत्सरी का संदेश: नफरत नहीं, प्रेम और क्षमा से जिएं जीवन ll
संवत्सरी का संदेश: नफरत नहीं, प्रेम और क्षमा से जिएं जीवन ll

सिरसा – (अक्षित कम्बोज ) संवत्सरी केवल जैन समुदाय का पर्व नहीं है, यह सम्पूर्ण मानवता के लिए एक जीवन-दर्शन है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन बहुत छोटा है और इसे नफरत में नहीं प्रेम और क्षमा में जीना चाहिए। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय कंगनपुर रोड़ पर संवत्सरी दिवस के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वर्षा के बाद धरती साफ हो जाती है, उसी प्रकार संवत्सरी के पश्चात आत्मा भी निर्मल हो जाती है। श्री साहुवाला ने कहा कि आज पूरा विश्व तनाव और संघर्ष से जूझ रहा है, तब भगवान महावीर का यह क्षमा संदेश एक शीतल जलधारा के समान है। उन्होंने कहा प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में एक बार भी सच्चे मन से अपने दोषों को स्वीकार कर क्षमा मांग ले और दूसरों को क्षमा कर दें, तो परिवार, समाज और राष्ट्र में शांति स्थापित हो सकती है। इसलिए हमें संवत्सरी का सच्चा उत्सव केवल मंदिर में नहीं, बल्कि अपने हृदय में अहंकार को त्यागने और सभी के प्रति मैत्री भाव रखने में है। उन्होंने कहा कि आज के युग में जब अहंकार, ईष्र्या, प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया पर द्वेष चरम पर है, संवत्सरी का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि हम अक्सर अने अहंकार के कारण रिश्ते तोड़ देते हैं और क्षमा मांगने को अपनी कमजोरी समझते है। उन्होंने कहा कि संवत्सरी हमें सिखाती है कि क्षमा मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा साहस है। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है जहाॅं प्रत्येक धर्म और संस्कृति अपने विशेष पर्वों और परम्पराओं से जीवन को अर्थ प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म, जो अहिंसा,सत्य, अस्तेय, ब्रहमचर्य और अपरिग्रह जैसे पाॅंच महाव्रतों पर आधारित है, में क्षमा को सर्वोच्च गुण माना गया है। इस अवसर पर सभी ने हाथ जोड़कर एक-दूसरे से कहा कि हमने मन, वचन द्वारा कोई हिंसा या किसी को कष्ट पहुंचाया है तो हम क्षमा मांगते है क्योंकि क्षमा ही दीनों का आभूषण हैं। इस अवसर पर ममता, रजनी, नीलम, हीना, मंजू, सोनम, सुनीता, रचना, उषा, लवली, मुस्कान, आरती, भावना एवं अन्य उपस्थित थे। @newstodayhry #newstodayhry




