बुज़ुर्गों की पेंशन का रास्ता अब सीधे मौत की ओर II
बुज़ुर्गों की पेंशन का रास्ता अब सीधे मौत की ओर II


बुज़ुर्गों की पेंशन का रास्ता अब सीधे मौत की ओर:-
पेंशन तो मिल जाएगी, पर जान हथेली पर रखनी होगी:-
पलवल-(निकुंज गर्ग ):- पलवल, 26 जुलाई सरकारी योजनाओं का दम भरने वाला सिस्टम पलवल जिले के बड़ौली गांव में बुज़ुर्गों और दिव्यांगों को हर महीने मौत के कुएं में धकेल रहा है। यहां का को-ऑपरेटिव बैंक दूसरी मंज़िल पर संचालित हो रहा है, और वहां तक जाने के लिए है सिर्फ एक पतली, खतरनाक, दम घोंटू सीढ़ी, जो न किसी व्हीलचेयर के लायक है, न किसी कांपते बुज़ुर्ग के। इस बैंक से दर्जनों गांवों के लोग पेंशन लेने आते हैं। लेकिन उम्र के आख़िरी पड़ाव पर जब सहारा चाहिए होता है, तब ये सिस्टम उन्हें इम्तिहान नहीं, सीधा फांसी का रास्ता थमा रहा है।
ये सिर्फ सीढ़ी नहीं, एक रोज़ की ज़िल्लत है:-
जिन बुज़ुर्गों ने पूरी ज़िंदगी देश और समाज के लिए खपा दी, उनके लिए सरकार ने “सम्मान” के नाम पर दिया है पेंशन लेने का ऐसा रास्ता, जहां चढ़ते हुए सांसें फूलें, पैर फिसलें और ज़िंदगी लुढ़क जाए। और इस सबके बीच बैंककर्मी कुर्सियों पर बैठे रहते हैं, और अधिकारी फोन काट देते हैं।
कमेटी बन गई और बुज़ुर्ग गिरते रहे:-
समाजसेवी डॉ. हरित बैसला इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने बार-बार प्रशासन और को-ऑपरेटिव बैंक प्रबंधन को लिखा, कॉल किया, मिलकर गुज़ारिश की। GM को फोन किया तो जवाब मिला –
“कमेटी बन गई है, एक महीने में विस्थापन कर देंगे।”
लेकिन सवाल ये है – कितने महीनों से बन रही है कमेटी?
कितनी बार गिरें बुज़ुर्ग?
और क्या कोई अधिकारी खुद कभी इन सीढ़ियों से पेंशन लेने आया है?
क्या किसी की लाश पर ही जागेगा सिस्टम?
हर महीने जब ये बुज़ुर्ग उस सीढ़ी पर चढ़ते हैं,
तो उनके पांव नहीं, सरकार की संवेदनहीनता डगमगाती है।ये हादसा नहीं, धीरे-धीरे हो रही सरकारी हत्या है — जिसे सब देख रहे हैं, पर कोई कुछ कर नहीं रहा।
क्या कोई VIP होता तो यही बैंक ऊपर चलता:-
क्या अधिकारी अपनी मां को भेजते इस सीढ़ी से?
क्या बुज़ुर्गों की जान इतनी सस्ती है :-
अब कमेटी नहीं, कार्रवाई चाहिए:-
बुज़ुर्गों को पेंशन देने के लिए ऐसे तंग और जानलेवा रास्ते देना अमानवीय है, क्रूर है, और असंवैधानिक है। ये सवाल अब बड़ौली का नहीं, पूरे सिस्टम की सोच का है।। #newstodayhry @newstodayhry



