आष्टा में स्वदेशी गणेश: बाहरी निर्भरता छोड़, स्थानीय कला को दिया बढ़ावा II
आष्टा में स्वदेशी गणेश: बाहरी निर्भरता छोड़, स्थानीय कला को दिया बढ़ावा II


आष्टा में स्वदेशी गणेश: बाहरी निर्भरता छोड़, स्थानीय कला को दिया बढ़ावा:-
आष्टा-(पवन कुमार लोधी):- आष्टा गणेश उत्सव की तैयारियाँ इस बार आष्टा में एक नए अंदाज में देखने को मिल रही हैं। पहले जहाँ शहर के मंडल भोपाल और इंदौर से बंगाली मूर्तियाँ मँगवाया करते थे, वहीं इस बार शहर की लगभग सभी समितियों ने स्थानीय स्तर पर ही मूर्ति निर्माण का फैसला किया है। यह बदलाव न केवल सुविधाजनक है, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर एक सार्थक कदम भी है।
गत चार वर्षों से, शहर में बंगाल से आए कलाकारों ने गणेश एवं दुर्गा मूर्तियों का निर्माण शुरू किया था:-
इससे मंडलों को बाहर से मूर्तियाँ मँगवाने की झंझट और खर्च से मुक्ति मिली। इस सफल पहल का असर अब पूरे शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। अब ग्रामीण अंचलों के मंडल भी आष्टा में ही निर्मित प्रतिमाओं को स्थापित कर रहे हैं। शहर में सैकड़ों की संख्या में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। मंडलों द्वारा भूमि पूजन के बाद पंडालों के निर्माण का कार्य भी जोरों पर है। नवदीप बालकृष्ण मंडल सहित कई मंडलों ने पहले ही भूमि पूजन करके अपने पंडालों का निर्माण शुरू कर दिया है।
अगले दस दिनों तक पूरा शहर भक्ति की अनूठी मिसाल पेश करेगा:-
सभी मंडलों पर भव्य आरती एवं महा आरती का आयोजन होगा। दस दिनों के उपरांत अनंत चतुर्दशी को आष्टा की सड़कों पर एक भव्य चल समारोह निकाला जाएगा, जो उत्सव के समापन पर विराम लगाएगा। इस बदलाव से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, बल्कि शहर के कलाकारों को भी एक नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है। यह आष्टा के लिए एक गर्व का क्षण है, जहाँ उत्सव ने स्थानीयता की नई राह पकड़ ली है।। #newstodayhry @newstodayhry



