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परंपरागत खेती छोड़ रचा नया इतिहास: अमरूद की खेती से सुरेंद्र सिंह ने बढ़ाया हरियाणा का मान II

परंपरागत खेती छोड़ रचा नया इतिहास: अमरूद की खेती से सुरेंद्र सिंह ने बढ़ाया हरियाणा का मान II

कुरुक्षेत्र-(संगीत गीत):- कुरुक्षेत्र सुरेंद्र सिंह हरियाणा के प्रगतिशील किसान है जो पिछले 5 वर्षों से अमरूद की खेती कर रहे है । किसान सुरेंद्र अमरूद की खेती से 5 से 6 लाख रुपए प्रति एकड़ सालाना की कमाई कर रहा है ,इनके अनुसार ताइवान अमरूद पहले वर्ष से ही कमाई देना शुरू कर देता है! बागवानी के क्षेत्र में अब किसान ऐसी फसलों की तरफ बढ़ रहे हैं जिसे किसानों को बंपर पैदावार हो रही है। किसान परंपरागत खेती को छोड़कर आधुनिक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे है ,इनमें एक है कुरुक्षेत्र के हथिरा गांव के रहने वाले सुरेंद्र जिन्होंने 5 साल पहले ताइवान पिंक वैरायटी का अमरूद का बाग लगाया था जिसे अब वह एक एकड़ से 1 साल में 5 से 6 लाख रुपए कमा रहे हैं।

2019 में लगाया था ताइवान पिंक अमरूद का बाग:-

किसान सुरेंद्र ढिल्लों ने कहा कि उन्होंने यूट्यूब पर अमरूद के बाग की कई वीडियो देखी इसके बाद उन्होंने सोचा कि परंपरागत तरीके की खेती को छोड़कर आधुनिक तरीके की खेती की जाए जिसके चलते उन्होंने अमरूद का बाग लगाने की सोची जिसे वह अब अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने खेत में ताइवान पिंक अमरूद की वैरायटी का बाग लगाया है जो ताइवान देश की वैरायटी है।

ताइवान पिंक अमरूद खाने में होता है लाजवाब:-

उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से इस अमरूद का नाम है उसे प्रकार से ही इसका स्वाद भी काफी लाजवाब होता है यह अंदर से पिंक कलर का होता है और खाने में भी काफी लाजवाब होता है। उन्होंने बताया कि इस वैरायटी की खास बात यह है कि यह 10 से 15 दिन तक आसानी से स्टोर किया जा सकता है जबकि अन्य दूसरी वैरायटी को इतने लंबे समय तक स्टोर करना मुश्किल होता है और वह खराब हो जाते हैं अगर किसान इसको अपने खेत से आज तोड़ता है तो करीब 10 से 15 दिन तक भी वह चुके तो रहते हैं ऐसे में ट्रांसपोर्ट में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आती।

किसान का कहना है कि:-

उन्होंने एक एकड़ में 2000 पौधे लगाए थे और इस वैरायटी की खास बात यह होती है कि इसमें तीन-चार साल तक इंतजार नहीं करना होता इसमें पहले साल से ही फ्रूटिंग शुरू हो जाती है जिसके चलते किसान को अच्छा मुनाफा होता है। उन्होंने बताया कि पहले साल फ्रूटिंग काफी कम होती है लेकिन किसान अपनी खर्चा और थोड़ा उसे अलग मुनाफा आसानी से निकाल लेता है जिसके चलते किसान को कोई भी परेशानी नहीं होती, खेत में 600 पौधे की जगह 2000 पर लगाए गए हैं अगर शुरुआती 2 साल में उनके ऊपर 5 से 10 किलो फल भी आता है तब भी किसान का खर्चा आसानी से निकल जाता है। सभी पौधे जल्दी तैयार हो जाएंगे और जल्दी तैयार होने के बाद उन्होंने उसमें से पौधे निकाल कर तीन एकड़ में वही पौधे लगाए जिसे अब वह 5 एकड़ में ताइवान पिंक अमरूद की खेती कर रहे हैं किसान का कहना है कि उनके खेत में करीब अब 600 पौधे हैं और अगर एक पौधे की बात करें एक पौधे पर 50 किलो फल आता है कम से कम रेट की बात करे तो ₹20 प्रति किलो के हिसाब से भी देखे तो एक एकड़ से 6 लाख रुपए सीधा कमाई हो रही है।

साल में दो बार आता है फल दिल्ली सप्लाई होता है:-

किसान ने बताया कि ताइवान पिंक वैरायटी में साल में दो बार फल आते हैं एक बार जुलाई में फ्रूटिंग शुरू होती है तो दूसरी बार नवंबर में सर्दियों की फ्रूटिंग शुरू हो जाती है। अगर मौसम थोड़ा अच्छा रहे तो मार्च अप्रैल में भी कुछ फ्रूटिंग बच जाती है जिसे बेचकर किसान अतिरिक्त लाभ ले लेता है उन्होंने कहा कि इस वैरायटी में 40 से ज्यादा तापमान नहीं होना चाहिए और ना ही ज्यादा कम तापमान होना चाहिए इसमें थोड़ा फ्रूट में दिक्कत हो जाती है उन्होंने बताया कि जब शुरुआती समय में यह शुरू होता है तब थोड़ा फल होता है तब वह आसपास की सब्जी मंडी में ही उसको बेच देते हैं लेकिन जब सीजन पीक पर होता है तब वह इसको दिल्ली सप्लाई करते हैं और वहां से अलग-अलग राज्यों में उनका अमरुद जाता है हालांकि इसकी डिमांड इतनी होती है कि इसकी दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में भी काफी खपत है।

एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं को मिला हुआ है रोजगार:-

उन्होंने कहा कि जहां वह खुद अमरूद का बाग लगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। तो वही गांव की महिलाओं को भी यहां पर रोजगार मिला हुआ है वह यहां पर निराई गुड़ाई और फ्रूट तोड़ने का काम करती है और पैकिंग का काम करती है ऐसे में उनके जरिए दर्जन भर महिलाओं के परिवार की रोजी रोटी यहां से चल रही है।

बाग में नहीं होता पेस्टिसाइड्स का प्रयोग:-

उन्होंने बताया कि वह अपने बाग में किसी भी प्रकार के पेस्टिसाइड का उपयोग नहीं करते हैं उन्होंने कहा कि अगर हम एक बार पौधे को पेस्टिसाइड देने लग जाए तो उसे बीमारियां भी काफी आनी शुरू हो जाती है जिसके चलते उन्होंने सिर्फ देसी खाद जो गोबर की होती है उसी को ही खेत में डाला है जिससे वह अच्छा प्रोडक्शन ले रहे हैं हालांकि फ्रूट फ्लाई की समस्या रहती है लेकिन उसके लिए उन्होंने फ्लाइट ट्रैप लगाया हुआ है जो काफी अच्छा काम करता है जिसके चलते वह लोगों को बिना दवाई का अमरूद खाने को दे रहे हैं।

विभाग भी देता है अमरूद का बाग लगाने पर अनुदान:-

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने 2019 में यह बाग लगाया था तब विभाग के द्वारा उनका ₹9000 प्रति एकड़ सहायता राशि दी गई थी लेकिन आज के समय में विभाग के द्वारा 43000 प्रति एकड़ सहायता राशि दी जाती है। और 75000 रूपए मेरा पानी मेरी विरासत के जरिए मिलते हैं ऐसे में किसानों को ₹50000 की सहायता मिल जाती है जो एक अच्छी बात है ऐसे में वह दूसरे किसानों को भी कहना चाहते हैं कि परंपरागत तरीके की खेती को छोड़कर आधुनिक तरीके की खेती करें और खुद के अपने खेतों में कुछ ना कुछ ऐसा करें जिससे वह अच्छा मुनाफा ले सके क्योंकि खेती में ऐसे बहुत से ऑप्शन है। अलग-अलग प्रकार की खेती करके किसान खेती से ही अच्छा पैसा कमा सकता है।

महिलाओं को काम के लिए दूर नहीं जाना पड़ता:-

बाग में काम करने आई महिलाओं को 400 रुपए प्रति एकड़ की दिहाड़ी पड़ती है ,सुरेंद्र के भाग में काम करने वाली महिला सुमन का कहना है कि उनके घर में 4 बचे ओर वो दोनों पति पत्नी है ,पति भी दिहाड़ी करते है एक की कमाई से घर चलना मुश्किल है लेकिन दोनों मिलकर कमाते है तो खर्च निकल जाता है ,वह पिछले 2 साल से सुरेंद्र सिंह के बाग में काम कर रही है । रानो देवी भी उन महिलाओं में से एक है जो सुरेंद्र के बाग में काम करने आती है उनके घर में 2 बेटे और आगे उनके बच्चे है दोनों बेटे भी मजदूरी करते है घर का खर्च चलना मुश्किल हो जाता था पिछले 6 महीने से वह भी काम पर आ रही है उनका कहना है उन्हें 400 रुपए मिलते है तो घर चलाने में मदद मिल जाती है और काम के लिए दूर भी नहीं जाना पड़ता ।

डॉ शिवेंदु प्रताप सिंह सोलंकी:-

जिला उद्यान अधिकारी कुरुक्षेत्र ने भी अमरूद की ताईवान पिंक वैरायटी को किसानों के लिए फायदेमंद बताया है उन्होंने कहा कि यह वैरायटी 8 महीने बाद फ्रूटिंग शुरू कर देती है ,,उन्होंने कहा कि हरियाणा के किसान हिसार सफेदा वैरायटी का अमरूद ज्यादा लगाते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस वैरायटी की तरफ भी आय है ।उन्होंने कहा ये अमरूद पिंक कलर का होता है और टेस्ट भी दूसरे अमरूदों से थोड़ा अलग है इसलिए इसे ज्याद पसंद किया जा रहा है ,उन्होंने कहा यह किसी भी क्लाइमेट में कामयाब है । उन्होंने कहा दूसरी वैरायटी के लिए जहां 2 से 3 साल का इंतजार करना पड़ता है वहीं ताइवान पिंक 8 से 9 महीने से ही फ्रूट देना शुरू कर देती है और किसान पहले साल से ही 65 हजार तक का मुनाफा ले सकते है ।

उन्होंने कहा कि:-

सरकार अमरूद ही नहीं हर फ्रूट पर अनुदान राशि दे रही है उन्होंने कहा बाग लगाने वाले किसानों को 43 हजार रुपए ओर मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत भी 7 हजार रुपए देती है ऐसे में किसानों को 50 हजार रुपए सरकार की तरफ से किसानों को दिए जा रहे है।। #newstodayhry @newstodayhry

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