नेशनल ओरल, हेड एवं नेक ऑन्कोपैथोलॉजी डे – 19 नवंबर 2025डॉ. अनीता बोर्जेस मेमोरियल ओरेशन POPMA द्वारा आयोजित

प्रैक्टिसिंग ओरल पैथोलॉजिस्ट्स एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन (POPMA) द्वारा 19 नवंबर 2025 को नेशनल ओरल, हेड एवं नेक ऑन्कोपैथोलॉजी डे का आयोजन किया गया। यह दिवस भारत में ऑन्कोपैथोलॉजी की नींव रखने वाली महान वैज्ञानिक डॉ. अनीता मारिया बोर्जेस (19.11.1947 – 18.09.2025) की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्होंने कैंसर निदान, शिक्षा और पैथोलॉजी सेवाओं को उच्चतर स्तर तक पहुँचाने में अतुलनीय भूमिका निभाई।
इस अवसर पर POPMA ने डॉ. अनीता बोर्जेस मेमोरियल ओरेशन लेक्चर का आयोजन किया, जिसे बॉम्बे हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (BHIMS), मुंबई के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट एवं पैलिएटिव केयर विशेषज्ञ डॉ. एरिक बोर्जेस ने प्रस्तुत किया। उनका व्याख्यान “गैर-कैंसर रोगियों में पैलिएटिव केयर” विषय पर आधारित था, जिसमें दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे रोगियों के लिए संवेदनशील, मानवीय और रोगी-केंद्रित देखभाल के महत्व पर गहन प्रकाश डाला गया। व्याख्यान की वैज्ञानिक गहराई, व्यावहारिक उपयोगिता और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण ने देश-विदेश से जुड़े प्रतिभागियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। सत्र के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से महसूस हुआ कि डॉ. बोर्जेस द्वारा स्थापित विज्ञान और सेवा, सटीकता और करुणा तथा क्लिनिकल उत्कृष्टता और मानवता के समन्वय की भावना कितनी समयातीत और प्रेरणादायी है।
भारत का पैथोलॉजी समुदाय 18 सितंबर 2025 को स्वर्गवासी हुईं डॉ. अनीता मारिया बोर्जेस के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है। “क्वीन ऑफ हिस्टोपैथोलॉजी” के रूप में पहचानी जाने वाली डॉ. बोर्जेस ने पाँच दशकों तक कैंसर पैथोलॉजी को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुँचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। टी.एन. मेडिकल कॉलेज, मुंबई से स्नातक होने के बाद उन्होंने मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर (न्यूयॉर्क) और रॉयल मार्सडन हॉस्पिटल (लंदन) में उच्च प्रशिक्षण प्राप्त किया। भारत लौटकर उन्होंने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में लंबे समय तक सेवा दी और सर्जिकल पैथोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं प्रमुख रहीं। इसके बाद उन्होंने एस.एल. रहेजा हॉस्पिटल (फोर्टिस), मुंबई में सेंटर फॉर ऑन्कोपैथोलॉजी का नेतृत्व किया तथा SRL डायग्नोस्टिक्स में निदेशक – हिस्टोपैथोलॉजी के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका प्रभाव संस्थानों की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला। उन्होंने टाटा मेमोरियल ट्रैवेलिंग स्कूल ऑफ ऑन्कोपैथोलॉजी की स्थापना की, जिसके माध्यम से विशेष प्रशिक्षण देश के छोटे शहरों और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुँचा। उन्होंने अपने व्याख्यानों से प्राप्त मानदेय लेने से इंकार करते हुए उसे भारत भर में पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं को सशक्त बनाने हेतु समर्पित किया। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने नि:शुल्क ऑनलाइन शिक्षण सत्र आरंभ किए, जिनसे भारत सहित एशिया, अफ्रीका और पूर्वी यूरोप के हजारों पैथोलॉजिस्ट लाभान्वित हुए। 2015 और 2022 में ग्लोबल पावर लिस्ट ऑफ पैथोलॉजिस्ट्स में शामिल होना उनके वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है, फिर भी वे सदैव विनम्र, सरल और विद्यार्थियों के प्रति स्नेहिल बनी रहीं। उनका प्रसिद्ध सिद्धांत — “एक पैथोलॉजिस्ट की तरह काम करो, लेकिन एक सर्जन की तरह सोचो” — आज भी अनगिनत ऑन्कोपैथोलॉजिस्ट्स के लिए मार्गदर्शक है।
POPMA को उनके मार्गदर्शन और सहयोग की सदैव याद रहेगी। अपने अंतिम वर्षों में भी उन्होंने युवा विशेषज्ञों को प्रोत्साहित करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। वर्ष 2025 में POPMA स्टडी क्लब में उनकी प्रस्तावित भागीदारी संगठन के लिए एक अनमोल स्मृति बनी रहेगी।
नेशनल ओरल, हेड एवं नेक ऑन्कोपैथोलॉजी डे हमें यह याद दिलाता है कि हमें डॉ. बोर्जेस द्वारा स्थापित मूल्यों—वैज्ञानिक ईमानदारी, उत्कृष्ट निदान, करुणामयी देखभाल, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाजसेवा—को आगे बढ़ाना है। POPMA निरंतर सीखने, अनुसंधान, जागरूकता और सहयोग के माध्यम से भारत में ओरल, हेड और नेक ऑन्कोपैथोलॉजी को सुदृढ़ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।



