गीता: जीवन की सरल, सच्ची और शक्तिशाली मार्गदर्शिका — प्रिंसीपल सुमन शर्मा II
गीता: जीवन की सरल, सच्ची और शक्तिशाली मार्गदर्शिका — प्रिंसीपल सुमन शर्मा II


जीवन की सच्ची, सरल और सबसे शक्तिशाली मार्गदर्शिका है गीता: सुमन शर्मा:-
सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- सिरसा गांव चोरमार स्थित दशमेश सीनियर सैकेंडरी स्कूल की प्रिंसीपल सुमन शर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए कहा कि भागवत गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की सबसे सच्ची, सबसे सरल और सबसे शक्तिशाली मार्गदर्शिका है। गीता हमें यह नहीं सिखाती कि जीवन में संघर्ष नहीं होंगे, बल्कि यह सिखाती है कि संघर्षों के बीच मन को स्थिर कैसे रखना है, कर्म को शुद्ध कैसे रखना है और जीवन को उद्देश्यपूर्ण कैसे जीना है? उन्नहोंने कहा कि भागवत में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि जो अपने मन को जीत लेता है, दुनिया की कोई शक्ति उसे हरा नहीं सकती और यही गीता की सबसे सुंदर शिक्षा है कि हमारी असली विजय बाहरी नहीं, भीतर की होती है। प्रिंसीपल ने कहा कि गीता का ज्ञान हमें यह भी समझाता है कि मन में भ्रम हो तो बुद्धि कमजोर पड़ती है, पर मन में शांति हो तो हर निर्णय सही दिशा में जाता है। आज के बदलते समय में चाहे परिवार हो, शिक्षा हो या करियर गीता हमें संतुलन, धैर्य और स्पष्टता प्रदान करती है। गीता की एक पंक्ति भी मार्गदर्शन बन जाती है। इसलिए यदि हमारे जीवन में गीता के शब्द, हमारे कर्म में उसकी निष्ठा और हमारे मन में उसकी शांति उतर जाए तो हर चुनौती अवसर बन जाती है और हर यात्रा उजाला। उन्होंने कहा कि आजकल व्यक्तित्व विकास बड़ा बन चुका है, एक स्मार्ट कोट सभी दरवाजे खोल देता है। व्यक्तित्व का मतलब है परसोना यानी बाहरी मुखौटा, पर मेरा मानना है कि व्यक्तित्व का अर्थ है यदि आपके मन में विचार शुद्ध हों, आपकी बोली में मिठास हो और आपके व्यवहार में विनम्रता हो तो आप सबसे सुंदर और सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व रखते हैं और यही सार भगवद् गीता हमें और गहराई से सिखाती है। भागवद गीता कहती है कि यदि विचार शुद्ध हों, भावनाएं निर्मल हों और मन शांत हो तो यही मनुष्य की सबसे सुंदर व्यक्तित्व है और जब विचार गीता से प्रेरित हों व कर्म निष्ठा से जुड़े हों, तो मनुष्य की पहचान स्वयं प्रभु संवार देते हैं ।। #newstodayhry @newstodayhry



