प्रकृति का प्रहार: नाथवाना में अंधड़ से गिरा दशकों पुराना ऐतिहासिक पीपल का पेड़, ग्रामीणों में मायूसी।।
प्रकृति का प्रहार: नाथवाना में अंधड़ से गिरा दशकों पुराना ऐतिहासिक पीपल का पेड़, ग्रामीणों में मायूसी।।

नाथवाना-/संगरिया (हनुमानगढ़) ( पंकज गोदारा ):-क्षेत्र में पिछले दिनों आए भीषण अंधड़ और तेज हवाओं ने जहाँ जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं नाथवाना गाँव के किकरवाली रोड पर स्थित एक ऐतिहासिक धरोहर को भी भारी नुकसान पहुँचाया है। दशकों पुराना और विशालकाय पीपल का पेड़, जो जमीदांरा मेडिकल स्टोर के पास स्थित था, तूफान की प्रचंडता को सहन नहीं कर सका और जड़ से उखड़कर धराशायी हो गया। एक युग का अंत: बेगाराम भाटी की निशानी मिट्टी में मिली
यह पीपल का पेड़ नाथवाना के गौरवशाली इतिहास का मूक गवाह था। ग्रामीणों के अनुसार, इसे लगभग 90-95 साल पहले गाँव के समाजसेवी स्व. बेगाराम भाटी ने अपने हाथों से लगाया था। उस दौर में जब यहाँ केवल कच्चे रास्ते हुआ करते थे और ऊँट-गाड़ियों का ही बोलबाला था, तब बेगाराम जी ने दूर-दराज से आने वाले मुसाफिरों की सुविधा और शीतल छाया के लिए यह पौधा रोपा था। आज इस विशाल वृक्ष के गिरने से ग्रामीणों ने अपनी एक अनमोल विरासत को खो दिया है।मददगार छाया का साथ छूटा, टला बड़ा हादसास्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने बताया कि यह पेड़ भीषण गर्मी के दिनों में राहगीरों और बेजुबान पशुओं के लिए एकमात्र सहारा था। अचानक आए अंधड़ के कारण पेड़ के गिरने से आसपास के लोग गहरे शोक में हैं। गनीमत यह रही कि जिस समय पेड़ गिरा, वहाँ कोई व्यक्ति या वाहन मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ी जनहानि होने से टल गई। पर्यावरण प्रेमियों ने जताया दुख, पुनः पौधारोपण का लिया संकल्पगाँव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि बेगाराम भाटी जैसे महापुरुषों की मेहनत से पले-बढ़े ऐसे पेड़ों का गिरना पर्यावरण के लिए एक अपूरणीय क्षति है। पवन गोयल, सलवंत राहड़ और अन्य ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने संकल्प लिया है कि वे बेगाराम जी की स्मृति में इसी स्थान पर पुनः पौधारोपण करेंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक बार फिर वही सुखद और शीतल छाया मिल सके।। #Newstodayhry @Newstodayhry




