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बरसात में डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने सावधानी बरतने की अपील की ll

बरसात में डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने सावधानी बरतने की अपील की ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमजन से अपील की गई है कि बरसात के मौसम के मद्देनजर नागरिक डेंगू, मलेरिया एवं अन्य मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतें। बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। उप सिविल सर्जन डा. अभिजीत गर्ग ने कहा कि नागरिकों द्वारा घर और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव करना तथा बुखार होने पर समय पर जांच करवाना जैसे छोटे-छोटे प्रयास गंभीर बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए कूलर का पानी नियमित रूप से खाली कर उसकी सफाई करें। गमलों, पुराने टायरों, डिब्बों, बोतलों तथा अन्य स्थानों पर पानी जमा न होने दें। पानी की टंकियों को ढक कर रखें और सप्ताह में एक दिन ‘ड्राई डे’ मनाकर घर में जमा पानी को पूरी तरह साफ करें। जहां पानी हटाना संभव न हो, वहां स्वास्थ्य विभाग की सलाह के अनुसार लार्विसाइड का उपयोग किया जा सकता है। नालियों को साफ रखें और कचरा जमा न होने दें। यदि कहीं पानी जमा दिखाई दे तो इसकी सूचना संबंधित स्थानीय निकाय विभाग को दें।
उन्होंने कहा कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर मुख्य रूप से दिन में काटता है, इसलिए दिन के समय भी मच्छरों से बचाव जरूरी है। मच्छरदानी, जाली आदि का प्रयोग करें तथा शरीर को अधिक से अधिक ढक कर रखें। मच्छर रिपेलेंट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति डेंगू से संक्रमित है तो उसे भी मच्छरों से बचाकर रखना चाहिए, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, आंखों में दर्द, उल्टी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न बरतें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और उपचार करवाएं। बिना चिकित्सीय सलाह दवा नहीं लेनी चाहिए। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।
उन्होंने बताया कि लगातार उल्टी या पेट दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आना, मल या उल्टी में खून आना, अत्यधिक कमजोरी या सुस्ती, सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी या चेतना में बदलाव तथा पेशाब कम होना जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुखार उतर जाना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता, इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलो-अप भी जरूरी है।उप सिविल सर्जन ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों में तेज बुखार, सुस्ती, उल्टी या पेट दर्द होने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लें। गर्भवती महिलाएं बुखार को हल्के में न लें और बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा न लें। बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों में जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है, इसलिए समय पर जांच और निगरानी आवश्यक है।मलेरिया से बचाव के संबंध में उन्होंने कहा कि बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, पसीना और कमजोरी जैसे लक्षण होने पर जांच करवानी चाहिए। मलेरिया की पुष्टि होने पर चिकित्सक द्वारा बताई गई दवा का पूरा कोर्स लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘मच्छर नहीं होंगे तो बीमारी नहीं होगी’। प्रत्येक व्यक्ति सप्ताह में कम से कम 10 मिनट अपने घर और आसपास की जांच के लिए निकाले और यह सुनिश्चित करे कि कहीं पानी जमा तो नहीं है।
उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि बुखार होने पर घबराएं नहीं, लेकिन लापरवाही भी न करें। समय पर डॉक्टर से संपर्क करें, जांच करवाएं, उपचार लें और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। उन्होंने कहा कि हर रुका हुआ पानी मच्छरजनित बीमारी का संभावित स्रोत है, जबकि प्रत्येक जागरूक नागरिक बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।@newstodayhry #Newstodayhry

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