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शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती

शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती ll

सिरसा – (अक्षित कम्बोज ) शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बप्प में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार के सदस्यों ने शहीद भगत सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों से उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नरेश कुमार ग्रोवर, राज्य शिक्षक पुरस्कार विजेता एवं प्रवक्ता अंग्रेजी, ने विद्यार्थियों को शहीद भगत सिंह के सम्पूर्ण जीवन परिचय, उनके संघर्ष, क्रांतिकारी विचारों और देश की स्वतंत्रता के लिए दिए गए बलिदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बंगा, लायलपुर जिले में हुआ था। उनका परिवार देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत था और बचपन से ही उनके मन में देश की स्वतंत्रता के प्रति गहरी भावना विकसित हुई। नरेश कुमार ग्रोवर ने बताया कि भगत सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा के बाद लाहौर के नेशनल कॉलेज में अध्ययन किया। वे केवल क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक गंभीर अध्येता और विचारक भी थे। उन्होंने युवाओं को संगठित करने के उद्देश्य से नौजवान भारत सभा के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े और स्वतंत्रता संघर्ष को नई वैचारिक दिशा देने में योगदान दिया। उन्होंने बताया कि 1928 में साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और बाद में उनकी मृत्यु ने भगत सिंह तथा उनके साथियों को गहराई से प्रभावित किया। इसके बाद ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या के मामले में भगत सिंह पर आरोप लगा। 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधान सभा में बम फेंककर ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों का विरोध किया और जानबूझकर गिरफ्तारी दी। इस घटना के दौरान उन्होंने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाए। नरेश कुमार ग्रोवर ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि जेल में भगत सिंह और उनके साथियों ने राजनीतिक कैदियों के साथ बेहतर व्यवहार तथा अधिकारों की मांग को लेकर लंबी भूख हड़ताल की। मुकदमे के दौरान भी उन्होंने अपने विचारों को निर्भीकता से सामने रखा। लाहौर षड्यंत्र मामले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को मृत्युदंड दिया गया और 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में उन्हें फांसी दे दी गई। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का जीवन केवल शौर्य और बलिदान की कहानी नहीं, बल्कि अध्ययन, चिंतन, देशप्रेम, सामाजिक परिवर्तन और युवाओं की जागरूकता का संदेश भी देता है। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश, समाज और राष्ट्रहित के लिए सकारात्मक योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर प्राचार्य मनीष कुमार मेहता ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भगत सिंह का त्याग और देश के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से भगत सिंह के जीवन और विचारों का अध्ययन करने तथा उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रकाश सिंह, प्रवीण कुमार, रोहतास कुमार, डॉ. अवतार सिंह, सुरेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार, संदीप कुमार, सुखविंदर सिंह, भूपेंद्र, सुनीता कोहली, सपना, मीनू, रोहित कुमार, अजय कुमार सहित विद्यालय के अन्य स्टाफ सदस्यों ने पुष्प अर्पित कर शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी। @newstodayhry #newstodayhry

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