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SIR पर विपक्ष को घेरा, सुमन सैनी बोलीं—लोकतंत्र को मिल रही मजबूती

SIR पर विपक्ष को घेरा, सुमन सैनी बोलीं—लोकतंत्र को मिल रही मजबूती

सिरसा :- (अक्षित कम्बोज )भारतीय जनता पार्टी की जिला सचिव सुमन सैनी ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)’ अभियान का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक युगांतकारी कदम बताया है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिहीन और आधुनिक बनाने की दिशा में यह अभियान मील का पत्थर साबित हो रहा है। सैनी के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष व स्वतंत्र है और हर वास्तविक नागरिक के मताधिकार की रक्षा करते हुए ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को धरातल पर मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का गौरवशाली लोकतंत्र आज अधिक सशक्त हो रहा है, जिससे आम जनता का भरोसा संवैधानिक प्रक्रियाओं में और गहरा हुआ है। भाजपा जिला सचिव ने मतदाता सूचियों में सुधार की इस राष्ट्र-हितैषी प्रक्रिया का विरोध करने पर कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा किया जा रहा यह प्रदर्शन किसी नीतिगत विसंगति के कारण नहीं है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक असफलता को छुपाने और जनता द्वारा लगातार नकारे जाने की हताशा व खीज को मिटाने का एक असफल प्रयास भर है। सैनी ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में देश की जागरूक जनता ने विकास और पारदर्शी राष्ट्रवाद के नाम पर विपक्ष की खोखली राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है और अब चुनावी धांधली का रास्ता बंद होते देख विपक्ष प्रक्रियागत सुधारों पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की नाकाम कोशिश कर रहा है। अभियान के तकनीकी व कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए भाजपा नेता ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत संचालित इस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुख्य उद्देश्य चुनावी सूचियों को पूरी तरह शुद्ध बनाना है। पिछले दो दशकों से जिन मतदाता सूचियों को अपडेट नहीं किया गया था, उनमें मौजूद अनुपस्थित, स्थानांतरित, नकली और मृत (एएसडीडी) मतदाताओं के नामों को हटाना लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हो चुका था। इस प्रक्रिया में हर नागरिक को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने, दावों को सत्यापित करने और किसी भी त्रुटि के खिलाफ अपील करने का पूरा पारदर्शी अवसर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो दल आज मतदाताओं के अधिकारों और लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं, उनका अपना इतिहास लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने वाले काले तथ्यों से भरा पड़ा है। उन्होंने याद दिलाया कि सन 1975 में केवल अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरे देश पर थोपा गया आपातकाल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे। इसके साथ ही पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने अपने शासनकाल में दर्जनों बार चुनी हुई प्रांतीय सरकारों को दुर्भावनापूर्ण तरीके से बर्खास्त कर संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों और चुनावी धांधलियों को राजनीतिक लाभ के लिए मूक सहमति दी जाती थी, लेकिन आज सिरसा सहित पूरे देश की जागरूक जनता विपक्ष के इन नकारात्मक इरादों को भली-भांति समझती है और पारदर्शी नीतियों के साथ खड़ी है।

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