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हिन्दी केवल भाषा नहीं, हमारी आत्मा है – हिन्दी दिवस पर बोले : स्वामी रमेश साहुवाला II

हिन्दी केवल भाषा नहीं, हमारी आत्मा है – हिन्दी दिवस पर बोले : स्वामी रमेश साहुवाला II

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- हिन्दी हमारी भाषा ही नही बल्कि आत्मा हैं और जिस प्रकार आत्मा के बिना व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता उसी प्रकार हिन्दी के बिना हमारा कोई अस्तित्व भी नहीं हैं। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने हिन्दी दिवस के अवसर पर स्थानीय मारुति मंदिर में क्लब द्वारा आयोजित सेमिनार हिन्दी देश का गौरव विषय पर बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिन्दी की उन्नति में हम सब को भरपूर सहयोग करना चाहिए और व्यक्ति को यह कोशिश करनी चाहिए कि वह बोलचाल में हिन्दी का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि हिन्दी हमारे गौरव का प्रतीक हैं और इसके प्रचार-प्रसार के लिए हमें अपना पूरा योगदान देना चाहिए तथा हिन्दी को समूचे हिन्दुस्तान की एकता की कड़ी के रूप में स्थापित करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को भारत की अधिकारिक भाशा के रूप में स्वीकार किया था, इस निर्णय को यादगार बनाने के लिए 1953 से हर साल यह दिन हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। हिन्दी दिवस सिर्फ एक भाशा का उत्सव नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान और एकता का प्रतीक है। यह हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता हैं और हमारी समृद्ध विरासत का सम्मान करने की प्रेरणा देता हैं, इसलिए हिन्दी दिवस हम सभी के लिए गर्व और सम्मान का दिन हैं। श्री साहुवाला ने कहा कि हिन्दी सम्पूर्ण रूप से वैज्ञानिक भाषा है और इसकी अपनी पहचान विश्व स्तर पर हैं।

उन्होंने कहा कि:-

हम अंग्रेजी विरोधी नहीं हैं बल्कि हम अपनी मातृभाषा से प्यार करते है और उसे ऊंचा उठाना चाहते है ताकि हम गौरवान्ति हो सके। उन्होंने कहा कि हमें आज संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हमें अपनी बात अपनी मातृभाषा हिन्दी में कहेंगें तथा जहाॅ अंग्रेजी सिखाने की विशेष कक्षाएं लगाई जा रही हैं वहीं हमें हिन्दी भाषा सिखाने की भी कक्षाएॅ लगानी होंगी। उन्होंने कहा कि हमारा दिल मातृभाषा हिन्दी के लिए तड़पता रहता हैं, इसलिए हमारा यह फर्ज बन जाता है कि हम इसका सम्मान करें। उन्होंने कहा कि हिन्दी का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है और इसका सम्बन्ध सम्पूर्ण राश्ट्र से हैं। इसलिए हमें इसकी उन्नति के लिए ज्यादा-से-ज्यादा प्रयत्न करना चाहिए और अपने इश्ट मित्रों को हिन्दी की पुस्तकें उपहार में देनी चाहिएं। उन्होंने कहा कि हिन्दी को हम गर्व से पढ़ते हैं और पढ़ाते है जिससे हमें आत्मिक संतुश्टि मिलती हैं।

श्री साहुवाला ने कहा कि:-

हम सभी को अपनी मातृभाशा हिन्दी पर गर्व करना चाहिए तथा हिन्दी केवल एक भाशा ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, परम्परा तथा पहचान का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह हमें एकजुट करती हैं और हमारे विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का महसूस प्र्रदान करती हैं। इसलिए हम सभी मिलकर हिन्दी को और बढ़ावा दें तथा अपने जीवन में अपनाएं। इससे पूर्व सैन्टर की संचालिका रजनी सोनी एवं दीपा ने मुख्यातिथि स्वामी रमेष साहुवाला का स्वागत किया तथा बेटियों ने हिन्दी पर एक बहुत ही सुन्दर पेंटिंग बनाई जिसमें हिन्दी के प्रति संदेश था जिस पर उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर ललिता, डिम्पल, शीतल, उशा, मंजू, चांदनी, रजनी, सोनम रानी, सुनीता सोनी, रचना, रूबी, कषीष, सोनिया, पुनिता, नीलम, रीना, गीता कौशल, ममता, मीना, परमजीत, राखी, कौशल्या, सीमा, सुनीता, कंवलजीत, खुषबु उपस्थित थे।। #newstodayhry @newstodayhry

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