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रक्तदान केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं,बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा II

रक्तदान केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं,बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा II

निसिंग-(जोगिंद्र सिंह):- रक्तदान केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं,बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा: लब्बू जांगड़ा एक यूनिट रक्त बचा सकता है तीन से चार लोगों की जान प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 18वीं पुण्यतिथि के अवसर पर संस्थान द्वारा भारत और नेपाल में रक्तदान महाअभियान चलाकर गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने का संकल्प लिया गया है। इस अवसर पर निसिंग क्षेत्र के अनेक भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।सभी अतिथियों ने दादी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। विशेष रूप से नारी शक्ति ने बढ़-चढ़कर रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। भाजपा नेता एवं पार्षद लब्बू जांगड़ा ने कहा कि रक्तदान से बढ़कर कोई दान नहीं है। रक्तदान करने से आपातकाल में किसी व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। लोगों को भ्रम है कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आती है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है। रक्तदान करने के कुछ ही घंटे में शरीर का रक्त पूरा हो जाता है।

बीके निर्मल दीदी ने बताया कि:-

यह शिविर न केवल रक्त की कमी को पूरा करेगा, बल्कि समाज में मानवता और विश्व बंधुत्व की भावना को भी सशक्त करेगा।उन्होंने बताया कि एक यूनिट रक्त तीन से चार लोगों की जान बचा सकता है। रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है यह केवल इंसान से इंसान को ही दिया जा सकता है। रक्तदान से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया सक्रिय होती है, आयरन लेवल संतुलित रहता है और हृदय रोग का खतरा कम होता है।उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। दादी प्रकाशमणि की पुण्य स्मृति में आयोजित इस शिविर में शामिल होकर सभी को जीवन बचाने के इस महायज्ञ का हिस्सा बनना चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता तथा रक्तदान के 24–48 घंटों के भीतर शरीर में नया रक्त बनने लगता है।। #newstodayhry @newstodayhry

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