Haryana
Trending

राष्ट्र निर्माण के महान शिल्पी थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: स्वामी रमेश साहुवाला ll

राष्ट्र निर्माण के महान शिल्पी थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: स्वामी रमेश साहुवाला ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- भारत के स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण में जिन नेताओं ने नींव का पत्थर रखा, उनमें डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा हैं। शिक्षाविद, उद्दोग निर्माता और प्रखर राष्ट्रवादी के रूप में जिन्होंने 52 साल के छोटे जीवन में वह कर दिखाया जो कई पीढ़ियां नहीं कर पातीं और आज हम उनके जीवन और विचारों को याद कर रहें है। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने स्थानीय मारुति मंदिर में डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जयंती पर देश भक्ति पर आधारित गीत संगीत प्रतियोगिता में बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। श्री साहुवाला ने कहा कि डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शिक्षा में मातृभाषा के पक्षधर थे और वे पश्चिम का अंधानुकरण करने के बजाय भारत को अपनी संस्कृति के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए तथा उद्दोग, शिक्षा और राजनीति में उनका योगदान आज भी मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता सर आशुतोष मुखर्जी बंगाल केसरी के नाम से प्रसिद्ध थे और विरासत में मिली शिक्षा और संस्कारों के कारण वे केवल 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्दालय के कुलपति बन गए तथा इस पद पर रहते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा में सुधार और विज्ञान तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कई काम किए।@newstodayhry #newstodayhry

उन्होंने कहा कि 1937 में डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राजनीति में प्रवेश किया। 1941 में वे अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष बने और देश के विभाजन के समय उन्होंने पुरजोर आवाज उठाकर यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहें। फिर 15 अगस्त 1947 के बाद पंडित नेहरू ने अपने मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री बनाया और मात्र तीन वर्षों में उन्होंने देश की औद्योगिक नींव रखी। इसके पश्चात 1948 की औद्योगिक नीति, हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, चितरंजन लोकोमोटिव और सिंदरी खाद कारखाना जैसे उपक्रम उनकी दूरदर्शिता का परिणाम हैं और विभाजन के बाद आए शरणार्थियों के पुनर्वास में भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री साहुवाला ने कहा कि 1950 में कश्मीर और विदेश नीति को लेकर मतभेद होने पर उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और उनका मानना था कि राष्ट्रहित से कोई समझौता नहीं हो सकता। इसके बाद 21 अक्टूबर 1951 को उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की जिसका उद्देश्य एक मजबूत, सांस्कृतिक और आत्मर्भिर भारत बनाना था। उन्होंने कहा कि डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का प्रसिद्ध नारा था – एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे। डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शिक्षा में मातृभाषा के पक्षधर थे और वे कहते थे कि पश्चिम का अंधानुकरण करने के बजाय भारत को अपनी संस्कृति के आधार पर आगे बढ़़ना चाहिए तथा उद्दोग, शिक्षा और राजनीति में उनका योगदान आज भी मार्गदर्शक हैं। इस अवसर पर देश भक्ति गीत-संगीत प्रतियोगिता करवाई गई जिसमें पूनम को प्रथम पुरस्कार, मीरा को द्वितीय पुरस्कार और किरण को तृतीय पुरस्कार मिला। इस अवसर पर क्लब के संस्थापक अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि स्वामी रमेश साहुवाला ने विजेताओं को प्रशस्ति पत्र देकर एवं गोल्ड मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर दीपिका, पूनम, नीलम, रजनी, अनिशा, किरण, मोनिका, फरीदा, सलमा, निशा, गायत्री, केशव, विनू शबीना, काजल, नवजोत, मीरा, सोनिया एवं अन्य उपस्थित थे।@newstodayhry #newstodayhry

Related Articles

Back to top button