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ऑनलाइन गेम और फर्जी लिंक बन रहे खतरा:- दीपक सहारन ,पुलिस अधीक्षक ll

ऑनलाइन गेम और फर्जी लिंक बन रहे खतरा:- दीपक सहारन ,पुलिस अधीक्षक ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-डिजिटल दौर में बच्चों का इंटरनेट और स्मार्टफोन से जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में साइबर ठग भी बच्चों को ऑनलाइन गेम, फर्जी ऑफर, इनाम और आकर्षक लिंक का लालच देकर अपना निशाना बना रहे हैं। इस खतरे को देखते हुए पुलिस अधीक्षक दीपक सहारन ने विशेष एडवाजरी जारी कर अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नियमित नजर रखें और उन्हें इंटरनेट सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाएं । पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आज के समय में बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना संभव नहीं है । स्कूल की पढ़ाई, ऑनलाइन क्लास, प्रोजेक्ट, गेमिंग और सोशल मीडिया के कारण बच्चे लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग कर रहे हैं । ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे यह जानें कि उनके बच्चे इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं और किन वेबसाइटों या एप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट का अनियंत्रित उपयोग कई तरह के खतरे पैदा कर रहा है। साइबर बुलिंग, फर्जी प्रोफाइल, ऑनलाइन ठगी, आपत्तिजनक सामग्री और अनजान लोगों से संपर्क जैसी गतिविधियां बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। कई बार बच्चे बिना जानकारी के संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर देते हैं या अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे वे साइबर अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं। @newstodayhry #newstodayhry एसपी दीपक सहारन ने कहा कि अभिभावक बच्चों को इंटरनेट के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में समझाएं। उन्हें बताया जाए कि किसी भी अनजान व्यक्ति से चैट न करें, अपनी फोटो, मोबाइल नंबर, पासवर्ड, बैंकिंग या अन्य निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें और मोबाइल पर आए किसी भी संदिग्ध लिंक या वेबसाइट पर क्लिक करने से बचें। इंटरनेट सुरक्षा से जुड़े वीडियो और जागरूकता सामग्री की मदद से भी बच्चों को सरल तरीके से जानकारी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों की नियमित समीक्षा करना भी जरूरी है। अभिभावक समय-समय पर डेटा उपयोग, डाउनलोड किए गए एप्स, ब्राउजिंग हिस्ट्री और इस्तेमाल की जा रही वेबसाइटों की जांच करें। इससे यह पता चल सकेगा कि बच्चा इंटरनेट का उपयोग किस उद्देश्य से कर रहा है और कहीं वह किसी जोखिम में तो नहीं है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बच्चों को अनुपयुक्त वेबसाइटों और एप्स से दूर रखने के लिए मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर में पैरेंटल कंट्रोल या पैरेंटल ब्लॉक का उपयोग करें। इससे बच्चों की उम्र के अनुसार सामग्री को सीमित किया जा सकता है और जोखिम वाली वेबसाइटों तक उनकी पहुंच रोकी जा सकती है।
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को खेलकूद, योग, पुस्तक पढ़ने और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करने की भी अपील की। इससे बच्चों का स्क्रीन टाइम कम होगा और इंटरनेट पर बिताया जाने वाला अनावश्यक समय घटेगा। नियमित शारीरिक गतिविधियां बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं।
एसपी ने सलाह दी कि यदि बच्चा अभिभावकों के मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग करता है तो उसके लिए अलग यूजर अकाउंट बनाया जाए। इससे महत्वपूर्ण दस्तावेज, निजी फाइलें और अन्य संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहेगी तथा बच्चे की ऑनलाइन गतिविधियों पर भी बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा केवल तकनीकी उपायों से नहीं, बल्कि अभिभावकों की सतर्कता, संवाद और जागरूकता से सुनिश्चित की जा सकती है। समय रहते सावधानी बरतकर बच्चों को साइबर अपराधियों से बचाया जा सकता है । @newstodayhry #newstodayhry

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