रोड़ी गांव में श्रद्धा और भक्ति से सम्पन्न हुआ वार्षिक भंडारा एवं धार्मिक समागम ll
रोड़ी गांव में श्रद्धा और भक्ति से सम्पन्न हुआ वार्षिक भंडारा एवं धार्मिक समागम ll

बड़ागुढ़ा (गुरनैब दंदीवाल):- क्षेत्र के कस्बा रोड़ी स्थित श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र प्रसिद्ध पुरातन डेरा बाबा दुधाधारी जी महाराज में बुधवार को वार्षिक भंडारा एवं धार्मिक समागम बड़े श्रद्धभाव से आयोजित किया गया। यह आयोजन ग्रमवासियों के सहयोग एवं डेरा गद्दीनशीन संत बाबा जोगिंद्र गिरी जी महाराज की अगुवाई में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। डेरा में उमड़ी भारी श्रद्धालुओं की भीड़ ने धार्मिक माहौल को और भी आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। इस धार्मिक आयोजन की शुरूआत 4 अगस्त, मंगलवार को विधिवत हवन यज्ञ से हुई, जिसमें पंडित जी के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन सामग्री अर्पित की। तत्पश्चात श्रीरामचरितमानस पाठ का आरंभ हुआ, जिसका भोग 5 अगस्त, बुधवार को विधिपूर्वक डाला गया। पाठ के भोग के उपरांत कवि-संकीर्तन जत्था द्वारा बाबा जी की महिमा का गुणगान किया गया, जिससे समागम का वातावरण भक्तिरस में डूब गया। कार्यक्रम के दौरान गाँव के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। उपस्थित श्रद्धालुओं में संत बाबा जोगिंद्र गिरी जी, सरपंच दर्शन सिंह, पूर्व सरपंच बलविंदर सिंह, पूर्व सरपंच मेजर सिंह, पूर्व सरपंच
केवल कृष्ण जिंदल, पहलवान गुरतेज सिंह गादड़, शाहजिंदर दंदीवाल, बाबा बलदेव दास महंत, विजय महंत, मक्खन सिंह प्रधान, जरनैल सिंह प्रधान, सुखदेव सिंह ब्लॉक समिति सदस्य, सुखदेव सिंह मैंबर, मलकीत सिंह, राम जी तरड़, सुखविंदर सुखी, शमशेर सिंह ,गुरचरण सिंह सहित पंच-सरपंच, साधु-संत, महंत एव स्थानीय ग्रामीण श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे। विशेष उल्लेखनीय है कि डेरा बाबा दुधाधारी में मंगलवार का दिन विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन श्रद्धलु दूर-दराज से आकर “मिठ्ठी रोटी मन्नी” का प्रसाद चढ़ाकर जाते हैं सुख समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की दुआ मांगते हैं, जिसे बाबा जी की कृपा से पूर्ण होने का विश्वास है। डेरा की स्थापना की पृष्ठभूमि भी अत्यंत प्रेरणादायक रही है। बताया जाता है कि वर्षों पूर्व पंजाब से रेलवे विभाग में सेवा देने के उपरांत संत महापुरुष हरचंद गिरी जो रोड़ी गाँव पहुंचे और यहां आकर कुटिया बनाकर भक्ति में लीन हो गए। उन्होंने अपना संपूर्ण जोवन अन्न त्यागकर केवल दूध पर निर्वाह करते हुए साधना में व्यतीत किया,
(केवल दुध पर जीवन) इसी से बाबा जी का नाम “बाबा दुधा धारी” के नाम से विख्यत हुए। 5 अगस्त 1963 को उन्होंने अपना पार्थिव चोला त्यागा और उसी स्थल पर उनकी समधि बनाई गई, जो आज डेरा के रूप में श्रद्धा का प्रमुख आस्था का केंद्र बन चुकी है। उनके बाद दूसरी गद्दी पर बाबा ओल गिरी जी महाराज ने सेवा की और वर्तमन में तीसरी गद्दी पर संत बाबा जोगिंद्र गिरी महाराज जी डेरा की सेवा एवं व्यवस्था को समर्पित भाव से निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में हर वर्ष यह वार्षिक भंडारा और धार्मिक आयोजन बड़ी भव्यता के साथ सम्पन्न होता है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत उदाहरण भी है। डेरा बाबा दुधा धारी आज भी श्रद्धालुओं की आस्थ, विश्वास और भक्ति का अटूट केंद्र बना हुआ है, जहां संत परंपरा की उज्ज्वल रेखा आज भी जीवंत है। आज बुधवार को श्रद्धालुओं ने डेरा में आयोजित भंडारा में लंगर ग्रहण किया और समाध पर जाकर माथा टेका व मन्नत मांगी।। #Newstodayhry @Newstodayhry




