कूड़े से बेहाल शहर, अब जिम्मेदारी निभाने की बारी ll
कूड़े से बेहाल शहर, अब जिम्मेदारी निभाने की बारी ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-अखिल भारतीय सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इंद्र गोयल ने कहा कि पिछले कई दिनों से शहर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कूड़े के ढेर में तब्दील होता जा रहा है। मुख्य बाजारों से लेकर गलियों और प्रमुख चौक-चौराहों तक जगह-जगह कचरा जमा है। कई डंपिंग प्वाइंट अपनी क्षमता से बाहर हो चुके हैं और बरसात के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार शहर में बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो चुका है तथा डोर-टू-डोर कलेक्शन भी प्रभावित हुआ है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल यह नहीं है कि शहर में कूड़ा क्यों जमा हो रहा है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि जब सफाई होती है तो झाड़ू लगाने के लिए इतने हाथ दिखाई देते हैं, लेकिन जब शहर वास्तव में गंदगी से जूझ रहा है तो वही चेहरे दिखाई क्यों नहीं देते? जब कोई स्वच्छता अभियान आयोजित होता है, तब सामाजिक संस्थाएं, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग झाड़ू हाथ में लेकर फोटो खिंचवाते दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीरें आती हैं, समाचारों में सुर्खियां बनती हैं और स्वच्छता का संदेश दिया जाता है। डा. गोयल ने कहा कि यह अच्छी बात है। लेकिन क्या स्वच्छता का अर्थ केवल एक दिन झाड़ू लगाना है? नहीं। स्वच्छता कोई कार्यक्रम नहीं, बल्कि निरंतर जिम्मेदारी है। आज जब शहर वास्तव में सफाई के संकट से गुजर रहा है, तब उन सभी लोगों और संस्थाओं की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है जो समाजसेवा और जनसेवा का दावा करते हैं।
सफाई कर्मचारी आखिर हमारे लिए क्या करते हैं?
डा. गोयल ने कहा कि हम अक्सर सफाई कर्मचारी को तब याद करते हैं जब वह काम नहीं करता। जब सुबह घर के बाहर से कूड़ा उठ जाता है, सड़क साफ मिलती है, बाजार में गंदगी नहीं होती और नालियां साफ रहती हैं, तब हम शायद ही सोचते हैं कि इसके पीछे किस व्यक्ति का श्रम है, लेकिन जिस दिन सफाई कर्मचारी काम रोक देता है, उसी दिन हमें पता चलता है कि शहर की व्यवस्था में उसकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। यह हड़ताल हमें यह सोचने का अवसर भी देती है कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं, उनकी मांगों, उनके सम्मान, सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों पर गंभीरता से बातचीत होनी चाहिए। मजदूर और प्रशासन आमने-सामने खड़े रहें और शहर बीच में पिसता रहे—यह किसी भी व्यवस्था के लिए स्वस्थ स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी सबसे बड़ी, सफाई कर्मचारियों की मांगें जायज हैं या नहीं, इसका फैसला बातचीत और नियमों के आधार पर होना चाहिए। लेकिन आम नागरिक को अनिश्चितकाल तक गंदगी के हवाले नहीं किया जा सकता। नगर परिषद और प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करनी चाहिए। सफाई व्यवस्था जैसी आवश्यक नागरिक सेवा पूरी तरह ठप हो जाए और कई दिनों तक कोई प्रभावी समाधान दिखाई न दे, तो यह प्रशासनिक क्षमता पर भी सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि सिरसा में प्रशासन द्वारा वैकल्पिक माध्यमों से कूड़ा उठाने के प्रयास किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन हड़ताल के कारण उन प्रयासों को भी विरोध का सामना करना पड़ा। ऐसे में जरूरत टकराव की नहीं, संवाद और समाधान की है। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को भी आगे आना चाहिए।
यह सवाल केवल सरकार या नगर परिषद से नहीं पूछा जाना चाहिए:
हमारी सामाजिक संस्थाएं भी क्या केवल सम्मान समारोह, स्थापना समारोह और फोटो अवसरों तक सीमित रहेंगी? यदि किसी संस्था के पास सैकड़ों कार्यकर्ता हैं, तो क्या वह प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी सफाई अभियान नहीं चला सकती? यदि हमारे जनप्रतिनिधि हजारों लोगों को एक कार्यक्रम में एकत्र कर सकते हैं, तो क्या वे शहर के सफाई संकट के समाधान के लिए सभी पक्षों को एक मेज पर नहीं ला सकते? यदि सामाजिक संस्थाएं रक्तदान शिविर, चिकित्सा शिविर और सेवा अभियान चला सकती हैं, तो स्वच्छता के संकट में सामूहिक श्रमदान क्यों नहीं हो सकता? यह किसी कर्मचारी की जगह लेने का प्रश्न नहीं है। यह संकट के समय नागरिक जिम्मेदारी निभाने का प्रश्न है। और हमारी अपनी जिम्मेदारी? इस पूरी समस्या में आम नागरिक की भूमिका भी कम नहीं है। कई बार हम घर साफ करके कचरा सड़क के किनारे डाल देते हैं। दुकान के सामने सफाई कर कचरा सड़क पर छोड़ देते हैं। बाजार में खाने-पीने की वस्तुओं का कचरा खुले में फेंक देते हैं। फिर उसी गंदगी की शिकायत भी हम करते हैं। हड़ताल के दौरान स्थिति और बिगड़ती है क्योंकि नियमित कूड़ा उठाने की व्यवस्था बाधित होती है। कई लोग मजबूरी में कूड़ा खुले स्थानों पर डालने लगते हैं, जिससे समस्या और बढ़ती जाती है, इसलिए प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों को भी संकल्प लेना होगा। स्वच्छ शहर केवल सरकारी कर्मचारियों से नहीं बनता। स्वच्छ शहर प्रशासन, सफाई कर्मचारी, सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों—सभी की साझा जिम्मेदारी से बनता है। आज का कूड़ा केवल सड़कों पर नहीं पड़ा है। यह हमारी व्यवस्था, हमारी संवेदनशीलता और हमारी सामाजिक जिम्मेदारी के सामने भी पड़ा हुआ एक बड़ा सवाल है। और इस सवाल का जवाब फोटो से नहीं, जिम्मेदारी से देना होगा। @newstodayhry #newstodayhry




