किसान संगठनों ने कालांवाली विधायक को सौंपा मांग पत्र ll
किसान संगठनों ने कालांवाली विधायक को सौंपा मांग पत्र ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देश के विपक्षी दल के विधायक एवं सांसदों को किसान मजदूरों की राष्ट्रव्यापी मांगों व सरकार की वायदाखिलाफी वाले पत्रों की प्रतियां प्रेषित करने के प्रोग्राम के तहत हलका कालांवाली के विधायक शीशपाल केहरवाला को संयुक्त किसान मोर्चा के घटक किसान संगठनों के प्रतिनिधि साथियों ने मांगों का प्रारूप सौंपा। इस शिष्टमंडल में आॅल इंडिया किसान सभा 1936, राष्ट्रीय किसान मंच, अखिल भारतीय किसान सभा, बी के यू एकता अग्राह्य के साथी शामिल रहे। 16 जनवरी 2026 को एसकेएम के आह्वान के बाद देशभर के गांवों में किसानों ने संकल्प लिया कि वे तब तक लगातार और व्यापक देशव्यापी संघर्ष जारी रखेंगे, जब तक मोदी सरकार द्वारा 9 दिसंबर 2021 को लिखित रूप से आश्वस्त सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। 12 फरवरी 2026 की सफल आम हड़ताल इन नीतिगत हमलों के खिलाफ मजदूरों और किसानों के संयुक्त प्रतिरोध का एक बड़ा प्रयास थी। उच्च स्तर के भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के संघर्ष की महान जीत, जिसने मोदी सरकार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग स्वीकार करने के लिए मजबूर किया, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के शासन में प्रदर्शित घोर अधिनायकवाद के ऊपर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनर्प्राप्ति की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 10 अगस्त 2026 को एक करोड़ किसानों, मजदूरों, खेत मजदूरों तथा छात्रों, युवाओं और महिलाओं सहित अन्य वर्गों ने मेहनतकश-विरोधी नीतियों और कॉरपोरेट-समर्थक मुक्त व्यापार समझौता नीतियों में बदलाव की मांग को लेकर एक विशाल जेल भरो संघर्ष आयोजित किया। किसान संगठनों ने विधायक से अनुरोध किया कि अपने पद और प्रभाव का उपयोग करते हुए केंद्र/राज्य सरकार पर इन मुद्दों पर तत्काल और सार्थक कार्रवाई के लिए दबाव डालें, ताकि आजीविका की रक्षा, सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने और जनता के सभी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।
ये हैं किसानों की 7 प्रमुख मांगें:
भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता नहीं। सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द किया जाए। सभी फसलों के लिए सी2+50 प्रतिशत की दर से कानूनी रूप से गारंटीकृत एमएसपी लागू किया जाए तथा खरीद की गारंटी दी जाए। ग्रामीण कर्जग्रस्तता तथा किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्याओं को समाप्त करने के लिए व्यापक कर्ज़माफी की जाए। प्रत्येक किसान आत्महत्या पीड़ित परिवार को 25 लाख का मुआवजा दिया जाए। चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए और सभी मजदूरों के लिए 31,000 की न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की जाए। मनरेगा को बहाल किया जाए तथा 200 दिनों के काम और 700 दैनिक मजदूरी की गारंटी दी जाए। बिजली निजीकरण विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक वापस लिए जाएं। जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं; कॉरपोरेट समर्थक भूमि पूलिंग नहीं। एलएआरआर अधिनियम 2013, आदिवासियों और गैर-आदिवासी वनवासियों के एफआरए 2006 तथा स्वशासन और आदिवासी स्वशासन संबंधी पीईएसए 1996 के आधार पर भूमि अधिकारों की रक्षा की जाए।
ये है स्थानीय मांगें:
भारतीय खाद्य निगम की रक्षा और मजबूती की जाए तथा भारतीय खाद्य निगम के साइलो में अडानी और लीप इंडिया के द्वैधाधिकार को समाप्त किया जाए। संप्रभु लघु और मध्यम उद्यम, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण एवं निर्यात क्षेत्रों में एफडीआई में नहीं। उर्वरक, ईंधन, पेट्रोल और डीजल की कमी एवं कालाबाजारी समाप्त की जाए तथा सब्सिडी बहाल करके कीमतों को नियंत्रित किया जाए। सार्वजनिक क्षेत्र में फसल एवं पशुधन बीमा योजना बनाई जाए। जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन के माध्यम से सभी खेतों तक सिंचाई पहुंचाई जाए। 10,000 प्रति माह सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जाए। पर्याप्त धनराशि के साथ पारदर्शी और प्रभावी बाढ़/सूखा आपदा राहत सुनिश्चित की जाए। अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र के लिए केंद्रीय बजट का 6 प्रतिशत और शिक्षा के लिए जीडीपी का 6 प्रतिशत आवंटित किया जाए। सहकारी समितियों को कॉरपोरेट कब्जे से बचाया जाए और किसानों की भूमिका बढ़ाने के लिए सहकारिताओं का लोकतांत्रीकरण किया जाए।@newstodayhry #newstodayhry




