कांडा बंधुओ ने किया सविधान शिल्पी को नमन।।
कांडा बंधुओ ने किया सविधान शिल्पी को नमन।।

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- पूर्व गृहराज्यमंत्री एवं हलोपा सुप्रीमो गोपाल कांडा और उनके अनुज श्री बाबा तारा जी कुटिया के मुख्य सेवक गोबिंद कांडा ने भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पी, बाबासाहेब भारत रत्न डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ.अंबेडकर ने समतामूलक न्यायपूर्ण समाज बनाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। आज हम उनके जीवन तथा विचारों से शिक्षा ग्रहण करके उनके आदर्शों को अपने आचरण में ढालने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि डा. अंबेडकर का समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए किया गया उनका संघर्ष हर पीढ़ी के लिए एक मिसाल बना रहेगा। उन्होंने समाज के वंचित वर्ग को शिक्षित व सशक्त किया और हमें न्याय व समता पर आधारित एक ऐसा प्रगतिशील संविधान दिया जिसने देश को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया। बाबासाहेब का विराट जीवन और उनके विचार हमारी प्रेरणा का केंद्र है। गौरतलब हो कि डा. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू में सूबेदार रामजी शकपाल एवं भीमाबाई की चौदहवीं संतान के रूप में हुआ था। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है, जो शायद ही कहीं और देखने को मिले।
कांडा बंधुओं ने देशवासियों को दी बैसाखी पर्व की बधाई
पूर्व गृहराज्यमंत्री एवं हलोपा सुप्रीमो गोपाल कांडा और उनके अनुज वरिष्ठ भाजपा नेता एवं श्री बाबा तारा जी कुटिया के मुख्य सेवक गोबिंद कांडा ने सभी को बैसाखी पर्व की बधाई देते हुए कहा कि किसानों के मन में फसलों को देखकर खुशी मिलती औऱ वह अपनी खुशी का इजहार बैसाखी के पर्व को मनाकर करते हैं। इस दिन सिख धर्म के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि इस पर्व को खासतौर पर पंजाब में मनाया जाता है। यह अप्रैल में मनाया जाने वाला प्रसिद्ध हिंदू त्योहारों में से एक है। वैसे तो पूरे भारत में बैसाखी का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन पंजाब में इस पर्व को लेकर एक अलग ही धूम देखने को मिलती है। इस दौरान खेतों में रबी की फसल पककर लहलहाती हैं, किसानों के मन में फसलों को देखकर खुशी मिलती औऱ वह अपनी खुशी का इजहार बैसाखी के पर्व को मनाकर करते हैं। इस दिन सिख धर्म के 10वें गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। साथ ही यह त्योहार सिख धर्म के लिए कुछ ऐतिहासिक मूल भी रखता है। इस दिन सिख धर्म के अंतिम गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना के लिए सिखों को संगठित किया था। वहीं ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि बैसाखी का उत्सव सिख धर्म के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी के शहादत के साथ शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जिस समय मुगलिया सल्तनत धर्म परिवर्तन औऱ अत्याचार की इबादत लिख रहा था, उस समय हिंदु धर्म औऱ उसके लोगों की सलामती के लिए गुरु तेग बहादुर जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाया। इसके बाद औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए प्रताड़ित किया, लेकिन वह इसमें नाकामयाब रहा। गुरु तेग बहादुर जी ने अपना शीश कटवा दिया लेकिन इस्लाम कुबुल नहीं किया। इस पर्व को लेकर यह भी खास मान्यता है।। #newstodayhry @newstodayhry




