ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों का डेटाबेस किया जाएगा।।
ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों का डेटाबेस किया जाएगा।।

फरीदाबाद-( पूजा शर्मा) :-भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है। इस मिशन के अंतर्गत गत 16 मार्च 2026 से राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसमें जनभागीदारी के माध्यम से देशभर के परिवारों, मंदिरों एवं संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम् ऐप’ के जरिए जियो-टैग कर सूचीबद्ध एवं डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है। ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के संबंध में आज बुधवार को हरियाणा के आर्काईव विभाग द्वारा राज्य स्तरीय वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सभी जिलों के नोडल अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।एडीसी एवं ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की जिला स्तरीय कमेटी के अध्यक्ष अंजलि श्रोतिया की अध्यक्षता में बुधवार को जिला सचिवालय स्थित सभागार में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का किया जाए उपयोग : एडीसीडीसी अंजलि ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग समन्वय बनाकर सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ करें और ऐसे स्थानों की सूची तैयार करें जहां दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मठों, मंदिरों, मस्जिदों, चर्च, गुरूद्वारे और निजी पुस्तकालयों के प्रबंधकों से संवाद स्थापित कर पांडुलिपियों के संरक्षण में उनका सहयोग लिया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि संरक्षण कार्य के दौरान मूल दस्तावेजों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए ताकि उच्च गुणवत्ता में उनका संग्रहण संभव हो सके।15 जून तक जारी रहेगा सर्वेक्षण का कार्य, 70 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को दी जाएगी प्राथमिकता15 जून तक जारी रहेगा सर्वेक्षण का कार्य, 70 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को दी जाएगी प्राथमिकताएडीसी अंजलि ने बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत लगभग 70 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की ओर से सर्वे कार्य को तीन माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो 16 मार्च से शुरू हो चुका है और 15 जून तक जारी रहेगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण और संरक्षण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।अभियान में पांडुलिपि धारकों का स्वामित्व रहेगा पूर्णत: सुरक्षित : एडीसीएडीसी ने आह्वान किया कि ज्ञान भारतम् मिशन के तहत आम नागरिक भी अपनी पांडुलिपियों की जानकारी सेक्टर 12 लघु सचिवालय स्थित एडीसी कार्यालय को या सीधे gyanbharatam.com/ वेबसाइट या play.google.com/store/apps/details?id=com.gyanbharatam.app&pli=1 मोबाइल ऐप के माध्यम से साझा कर सकते हैं।चिन्हित पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान में पांडुलिपि धारकों का स्वामित्व पूर्णत: सुरक्षित रहेगा। उन्होंने सर्वेक्षण के तहत सरकारी पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों, संस्कृत पाठशालाओं तथा मंदिरों, गुरुद्वारों और मठों जैसे धार्मिक स्थलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान और दस्तावेजीकरण करने के साथ-साथ पांडुलिपियों की भौतिक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए। बैठक में नगराधीश अंकित कुमार, सीईओ जिला परिषद शिखा, डीआईपीआरओ मूर्ति दलाल, सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण, विभिन्न धार्मिक संस्थानों के प्रतिनिधि व शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।। #Newstodayhry @Newstodayhry


