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भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बलिदान दिवस पर किया नमन।।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बलिदान दिवस पर किया नमन।।

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’ और ‘ एक भारत – श्रेष्ठ भारत’ का नारा बुलंद करने वाले प्रखर राष्ट्रवादी, भारतीय जनसंघ के संस्थापक, डॉ. श्यामा प्रसाद जी मुखर्जी के बलिदान दिवस पर हरियाणा लोकहित पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री गोपाल कांडा ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। भारतीय राजनीति में उनके योगदान को नमन करते हुए गोपाल कांडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सरकार डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार कर रही है। वरिष्ठ भाजपा नेता गोबिंद कांडा ने भी डॉक्टर मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें प्रखर राष्ट्रनायक बताया।
पूर्व मंत्री गोपाल कांडा ने अपने पिता बाबू मुरलीधर कांडा एडवोकेट के स्मृति एल्बम से मीडिया एवं सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में डॉ. मुखर्जी की स्मृति में बाबू मुरलीधर कांडा एक डाक टिकट जारी कर रहे हैं। गोपाल कांडा और गोबिंद कांडा ने महान शिक्षाविद एवं राष्ट्रवादी नेता डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भावपूर्ण नमन करते हुए कहा कि उनके विचारों को सहमति और समर्थन देते हुए ही पिता मुरलीधर कांडा ने भारतीय जनसंघ की टिकट पर डबवाली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। चाहे जम्मू कश्मीर को लेकर डॉक्टर मुखर्जी द्वारा चलाए गए आंदोलन की बात हो या समृद्ध भारत, बुलन्द भारत की बात, सदैव बाबू मुरलीधर कांडा ने उनका समर्थन किया। कांडा बंधुओं ने कहा कि देश की एनडीए सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉक्टर मुखर्जी जैसे सच्चे राष्ट्र नायकों के सपनों और विचारों पर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लागू कर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार किया। गोपाल कांडा एवं गोबिंद कांडा ने कहा डॉ. मुखर्जी को भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। संसद में अपने भाषण में उन्होंने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की थी। अगस्त 1952 में जम्मू कश्मीर की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि ”या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूंगा”। डॉ. मुखर्जी अपने संकल्प को पूरा करने के लिये 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। जेल में उनकी मृत्यु ने देश को हिलाकर रख दिया और परमिट सिस्टम समाप्त हो गया। उन्होंने कश्मीर को लेकर एक नारा दिया था,“नहीं चलेगा एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान”। कांडा बंधुओं ने कहा कि देश की सरकार ने डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी है और राष्ट्र को एकजुट करने के लिए दिए गए उनके विचार को मूर्त रूप प्रदान करने का कार्य किया।। #Newstodayhry @Newstodayhry

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