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अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर स्वामी रमेश साहुवाला का संदेश, “एकता ही मानव सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत” ll

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर स्वामी रमेश साहुवाला का संदेश, "एकता ही मानव सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत" ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज ):– स्वामी रमेश साहुवाला :- मानव सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत एकता हैं। जब लोग अपने स्वार्थ से उपर उठकर मिलजुल कर काम करते हैं तो असंभव भी संभव हो जाता हैं। इसी भावना को सहकारिता कहते हैं। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने अंतराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर स्थानीय चतरगढ़ पट्टी में महिलाओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। श्री साहुवाला ने कहा कि सहकारिता के इसी महत्त्व को समझने के लिए हर साल जुलाई महीने में अंतराष्ट्रीय सहकारिता दिवस मनाया जाता हैं।
श्री साहुवाला ने कहा कि सहकारिता का शाब्दिक अर्थ हैं साथ मिलकर काम करना। इसमें समान आर्थिक और सामाजिक जरूरत वाले लोग स्वेच्छा से एक संगठन बनाते है। उन्होंने कहा कि यह संगठन लोकतांत्रिक तरीके से चलता हैं और इसमे हर सदस्य को बराबर का अधिकार मिलता हैं जिसका मूल सिद्धांत हैं एक सबके लिए, सब एक के लिए। लाभ को बराबर बांटा जाता हैं और निर्णय सभी की सहमति से लिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देशय लोगों को सहकारी संस्थाओं की भूमिका और उपब्धियों के बारे में जागरूक करना हैं और छोटे किसानों, महिलओं और कमजोर वर्गोें को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना हैं। श्री साहुवाला ने कहा कि समाज में समानता, एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ाने के साथ-साथ गरीबी, भूख और बेरोजगारी जैसी वैश्विक समस्याओं को सहकारिता के माध्यम से हल करना तथा सरकार की नीतियों को जमीनी स्तर में जनता तक पहुंचाना भी इसके मुख्य उद्देशय में शामिल हैं।
श्री साहुवाला ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश हैं जिसमें अमूल, इफको और कृभकों, नाफेड, नाबार्ड, सहकारी बैंक, ट्राइफेड आदि होता हैं। उन्होंने कहा कि आज महंगाई, बेरोजगारी, जलवायु परिर्वतन और काॅपर्रेट एकाधिकार जैसी समस्याएं बढ़ रहीं हैं। ऐसे समय मे सहकारिता एक बेहतर विकल्प हैं जो कि सरकार का लक्ष्य सहकार से समृद्ध हैं। इसके तहत हर पंचायत में कम से कम एक सहकारी समिति बनाने का लक्ष्य रखा गया हैं जिसमें सहकारिता से न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि अंतराष्ट्रीय सहकारिता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि अकेले हम कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन साथ मिलकर हम बहुत कुछ कर सकते है। सहकारिता केवल पैसा कमाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम इस भावना को अपनाएं तो विकसित भारत 2047 का सपना जरूर साकार होगा।

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