संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) एवं बीकेई ने राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री के नाम सौंपे मांग पत्र।।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) एवं बीकेई ने राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री के नाम सौंपे मांग पत्र।।

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):- किसानों, मजदूरों एवं ग्रामीणों की राष्ट्रीय एवं स्थानीय समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) भारत की ओर से महामहिम राष्ट्रपति के नाम तथा भारतीय किसान एकता (बीकेई) की ओर से हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम अलग-अलग विस्तृत मांग-पत्र प्रशासन के माध्यम से सौंपे गए। बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने बताया कि सर्वप्रथम जाट धर्मशाला में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) व बीकेई पदाधिकारियों की मीटिंग हुई। इसके बाद किसान पैदल मार्च करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। दोनों संगठनों के प्रतिनिधिमंडल को जिला उपायुक्त ने मीटिंग के लिए बुलाया। काफी देर तक मीटिंग चली। इसके बाद उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि किसानों की मांगों को सरकार तक पहुंचाकर तुरंत समाधान करवाया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने अपने मांग-पत्र में केंद्र सरकार से किसानों को सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सी-2+50 प्रतिशत सिफारिशों को लागू करने, किसानों एवं मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ करने, मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने, बिजली संशोधन विधेयक 2025 एवं बीज विधेयक 2025 वापस लेने, किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का पूर्ण मुआवजा देने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में व्यापक सुधार करने तथा खेती-किसानी को बचाने वाली किसान हितैषी नीतियां लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई। वहीं भारतीय किसान एकता (बीकेई) द्वारा हरियाणा सरकार को सौंपे गए मांग-पत्र में सिरसा जिले सहित प्रदेश के किसानों की स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। मांग-पत्र में खरीफ 2026 के दौरान अल्प वर्षा, नहरी पानी एवं बिजली की कमी से खराब हुई धान, नरमा, कपास, ग्वार सहित सभी फसलों के लिए विशेष राहत पैकेज एवं पर्याप्त मुआवजा देने, नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने, किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने, डीएपी एवं यूरिया की कालाबाजारी रोकने, नकली बीज एवं कीटनाशकों पर कार्रवाई करने, लंबित फसल मुआवजा एवं फसल बीमा क्लेम जारी करने, आवारा पशुओं एवं जंगली सूअरों से किसानों की सुरक्षा, मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल की समस्याओं का समाधान, सभी फसलों की समय पर सरकारी खरीद तथा किसानों के लंबित भुगतान व सब्सिडी जारी करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारें किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने में लगातार विफल रही हैं। यदि राष्ट्रीय एवं स्थानीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) एवं भारतीय किसान एकता आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकारों की होगी। उन्होंने कहा कि किसान केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए सरकारों को किसान विरोधी नीतियां छोड़कर किसानों के साथ न्याय करना चाहिए। इस मौके पर सिरसा जिले के कई गांवों से किसान पहुंचे, जिसमें शाहपुरिया, खेड़ी, गुसाईयाना, तरकांवाली, गुड़ियाखेड़ा, डिंग मंडी, कोटली, उमेदपुरा, प्रतापनगर, ऐलनाबाद, बचेर, नथोर, कालुआना, सादेवाला, मम्मड़, बनी, रोड़ी, जलालआना, रोहिड़ावाली, फगु, वीरूवाला गुढ़ा, थिराज, साहूवाला, रंगा, घुककावाली, भंगू, थिराज, साहूवाला, पीरखेड़ा, रघुआना, फूलकां, दमदमा सालामखेड़ा, गिगोंरानी, सुल्तानपुरीया, बिजुवाली, वनवाला सहित दर्जनों गांव के किसान व ग्रामीण उपस्थित थे।। #Newstodayhry @Newstodayhry




