बाबा जीवन सिंह जी के जन्मदिवस पर 5 सितंबर को सरकारी अवकाश की मांग ll
बाबा जीवन सिंह जी के जन्मदिवस पर 5 सितंबर को सरकारी अवकाश की मांग ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-आॅल इंडिया मजहबी सिख वेलफेयर एसोसिएशन ने पंजाब एवं हरियाणा सरकार से पुरजोर मांग की है कि हर वर्ष 5 सितंबर को रंघरेटे गुरु के बेटे, शिरोमणि जरनैल अमर शहीद बाबा जीवन सिंह जी के जन्म दिवस के अवसर पर स्थायी राजपत्रित/सार्वजनिक सरकारी अवकाश घोषित किया जाए। एसोसिएशन का कहना है कि यह मांग किसी व्यक्ति अथवा समुदाय को विशेष सुविधा देने की मांग नहीं, बल्कि सिख इतिहास, गुरु-घर की सेवा, धार्मिक स्वतंत्रता, मानवता, सामाजिक समानता और महान शहादत की परंपरा को राजकीय सम्मान देने की मांग है। एसोसिएशन के राष्टÑीय संयोजक स. सविंद्र सिंह सिरसा ने बताया कि सिख इतिहास की महान परंपरा में अमर शहीद बाबा जीवन सिंह, भाई जैता जी का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है। गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के बाद उनके पवित्र शीश को दिल्ली के चांदनी चौक से सुरक्षित रूप से श्री आनंदपुर साहिब पहुंचाने की सेवा से बाबा जीवन सिंह जी का नाम गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह सेवा केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म की स्वतंत्रता, मानवाधिकार, गुरु-भक्ति और अदम्य साहस का प्रतीक है। सिख परंपरा में इसी महान सेवा के संदर्भ में दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा भाई जैता जी को रंघरेटे गुरु के बेटे कहकर सम्मानित किए जाने की परंपरा अत्यंत श्रद्धा से स्मरण की जाती है। यह संबोधन सामाजिक समानता और गुरु के दरबार में मनुष्य की गरिमा का भी शक्तिशाली संदेश देता है।
एक महान सेवा के पीछे छिपे अनेक बलिदान:
स. सविंद्र सिंह सिरसा ने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहिब जी के पवित्र शीश को सुरक्षित रूप से आनंदपुर साहिब पहुंचाने की घटना के साथ अनेक सेवकों और बलिदानियों की परंपरा जुड़ी हुई है। बाबा जीवन सिंह के पिता भाई सदानंद तथा परिवार एवं सहयोगियों से संबंधित बलिदान-परंपराएं सिख इतिहास में श्रद्धा से वर्णित होती रही हैं। भाई सदानंद का प्रसंग विशेष रूप से गुरु-घर के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक माना जाता है। विभिन्न ऐतिहासिक एवं परंपरागत स्रोतों में इस प्रसंग के विवरणों में अंतर मिलता है। इसलिए एसोसिएशन का स्पष्ट मत है कि इस गौरवशाली इतिहास पर प्रमाणिक, स्रोत-आधारित और अकादमिक शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ियां तथ्यों और परंपरा—दोनों को सही संदर्भ में समझ सकें। इस दृष्टि से बाबा जीवन सिंह जी की गाथा केवल एक व्यक्ति की वीरता नहीं, बल्कि एक परिवार और अनेक पीढ़ियों की गुरु-घर के प्रति सेवा, त्याग और बलिदान की गाथा है।
5 सितंबर को अवकाश क्यों आवश्यक है?
एसोसिएशन के अनुसार सरकारी अवकाश केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं होता। वह समाज और सरकार की ओर से किसी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, धार्मिक अथवा राष्ट्रीय स्मृति को सार्वजनिक सम्मान देने का माध्यम भी है। 5 सितंबर को स्थायी सरकारी अवकाश घोषित किए जाने से बाबा जीवन सिंह जी के जीवन और शहादत को राजकीय सम्मान मिलेगा। नई पीढ़ी को सिख इतिहास और गुरु-घर की सेवा की महान परंपरा से परिचित कराने का अवसर मिलेगा। सामाजिक समानता, भाईचारे और मानव गरिमा का संदेश मजबूत होगा। विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में इतिहास-चर्चा, संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। पंजाब और हरियाणा की सांझा सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत को उचित सम्मान मिलेगा। वंचित एवं श्रमिक समाज के ऐतिहासिक योगदान को सार्वजनिक इतिहास में उचित स्थान मिलेगा।
यह मांग किसी के विरुद्ध नहीं—सम्मान के पक्ष में है:
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि 5 सितंबर के अवकाश की मांग किसी अन्य धर्म, समाज या समुदाय के अधिकारों के विरुद्ध नहीं है। यह मांग गुरु-घर के प्रति अद्वितीय सेवा करने वाले, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले तथा चमकौर की गढ़ी में वीरतापूर्वक शहादत प्राप्त करने वाले महान योद्धा की स्मृति को सम्मान देने की मांग है। जिस महान व्यक्तित्व को सिख परंपरा में दशमेश पिता से रंघरेटे गुरु के बेटे जैसा गौरवपूर्ण संबोधन प्राप्त हुआ, उसकी स्मृति को राजकीय स्तर पर सम्मानित करना इतिहास और समाज—दोनों के प्रति सम्मान का प्रतीक होगा। आॅल इंडिया मजहबी सिख वेलफेयर एसोसिएशन पंजाब और हरियाणा सरकार से अपील करती है कि इस मांग को केवल प्रशासनिक अवकाश के विषय के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे इतिहास, शहादत, समानता और सामाजिक सम्मान के व्यापक संदर्भ में स्वीकार किया जाए। @newstodayhry #newstodayhry




