राष्ट्रीय पुस्तक पठन दिवस पर बोले स्वामी रमेश साहुवाला: किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र ll
राष्ट्रीय पुस्तक पठन दिवस पर बोले स्वामी रमेश साहुवाला: किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-किताबें हमें वह सिखाती है जो कोई स्कूल नहीं सिखा सकता। इतिहास, विज्ञान, संस्कृति, धर्म, आत्मकथा – हर विषय का ज्ञान किताबों में है। एक व्यक्ति अपने एक जीवन में सब कुछ अनुभव नहीं कर सकता, लेकिन किताबों के माध्यम से वह हजारों लोगों के अनुभवों से सीख सकता है। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने राष्ट्रीय पुस्तक पठन दिवस पर स्थानीय कंगनपुर रोड़ पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किताबे मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं जो कभी धोखा नहीं देती तथा असली ज्ञान स्क्रीन पर नहीं, बल्कि किताबो के पन्नों में है।
श्री साहुवाला ने कहा कि यह दिवस पुस्तक प्रेमियों के लिए एक उत्सव है, जो हमें फिर से किताबों की खुशबु, पन्नों को पलटने के सुख और एकांत में पढ़ने के आनन्द से जोड़ता है। उन्होनें कहा कि आज औसत युवा दिन में 6 से 8 घंटे मोबाइल स्क्रीन पर बिताता है जिससे आंखों में जलन, नींद में कमी और तनाव इसका परिणाम है। इसलिए किताबे पढ़ना इस डिजिटल थकान का सबसे अच्छा इलाज है।
उन्होंने कहा कि किताबें ही वह माध्यम हैं जो अमीर-गरीब, छोटे-बड़े सबको एक समान ज्ञान देती हैं और यह दिवस पुस्तकालयों और सस्ती पुस्तकों के महत्त्व को बताता है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक शोध कहते हैं कि रोजाना सिर्फ 20 मिनट किताब पढ़ने से तनाव 68 प्रतिशत तक कम हो जाता है और संगीत सुनने और टहलने से भी अधिक प्रभावी है तथा किताब पढ़ते समय हम अपनी चिंताओं को भूलकर एक नई दिशा में चल जाते हैं।
श्री साहुवाला ने कहा कि किताब कभी शिकायत नहीं करती, कभी साथ नहीं छोड़ती तथा विद्दार्थियों के लिए, घर में रहने वाली महिलाओं के लिए और बुजुर्गों के लिए किताब सबसे अच्छी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आज के बच्चे किताब को बोझ समझते हैैं। हमें उन्हें यह समझाना होगा कि किताब बोझ नहीं, बल्कि भविष्य बनाने का औजार है। इसलिए हमें अपने दिन की शुरूआत 1 घंटा बिना मोबाइल के, केवल किताब पढ़कर करें।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पठन दिवस हमें यह याद दिलाता है कि जिस समाज में किताबे पढ़ी जाती हैं, वहीं समाज आगे बढ़ता है। मोबाइल की बैटरी खत्म हो सकती है, इंटरनेट बंद हो सकता है, लेकिन किताब का ज्ञान कभी खत्म नहीं होता। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आओ हम संकल्प लें कि हम साल में कम से कम 12 किताबें यानी हर महीने एक किताब अवश्य पढे़ंगे। इस अवसर पर सभी को संकल्प दिलाया गया।@newstodayhry #newstodayhry



