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एक संकल्प… दो जिंदगियों में रोशनी! 50 महिलाओं ने भरे नेत्रदान फॉर्म ll

एक संकल्प... दो जिंदगियों में रोशनी! 50 महिलाओं ने भरे नेत्रदान फॉर्म ll

सिरसा – (अक्षित कम्बोज )आंखें मनुष्य के शरीर का सबसे सुन्दर और महत्त्वपूर्ण अंग हैं तथा इसके बिना इस सुंदर संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती तथा हम सूरज की रोशनी, फूलों के रंग, मां की ममता भरी मुस्कान,बच्चों की किलकारी – ये सब आंखों से ही देख पाते हैं। ये शब्द लायन्स क्लब सिरसा अमर के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रमेश साहुवाला ने राष्ट्रीय नेत्रदान दिवस के अवसर पर स्थानीय प्रीत नगर में कहें। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी आपका जीवन किसी और के काम आ सकता है क्योंकि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को रोशनी मिलती है जोकि समाज के प्रति अंतिम और सबसे बड़ी सेवा है। श्री साहुवाला ने कहा कि भारत को विश्व में काॅर्नियल अंधता की राजधानी कहा जाता है क्योंकि भारत में लगभग 12 लाख लोग काॅर्निया खराब होने के कारण नेत्रहीन हैं और हर साल इसमें 20 से 25 हजार नए मरीज जुड़ जाते हैं जिनमें से बच्चों की बड़ी संख्या है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार भारत में हर साल लगभग एक लाख काॅर्निया की जरूरत है, लेकिन 25 से 30 हजार काॅर्निया ही मिल पाते है यानी 70 हजार से ज्यादा लोग हर साल इंतजार करते-करते अंधेरे में ही रह जाते है जिसका बड़ा कारण है जागरूकता में कमी और अंधविश्वास। उन्होंने कहा कि नेत्रदान में उम्र का कोई बंधन नहीं है। इसमें 2 साल के बच्चे से लेकर 90 साल के बुजुर्ग तक नेत्रदान कर सकते हैं तथा चश्मा पहनने वाले, मोतियाबिंद या मधुमेह के मरीज भी नेत्र दान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मृत्यु के 6 से 8 घंटे के अंदर नेत्रदान हो जाना चाहिए, इसलिए देर नहीं करनी चाहिए और मृत्यु के तुरन्त बाद अपने नजदीकी नेत्र बैंक को सूचित करें और नेत्र बैंक की टीम आकर रक्त जांच और आंखों की जांच करके केवल 15 से 20 मिनट में बहुत ही सावधानी से कॉर्निया निकालती है तथा आंख की जगह कृत्रिम कवच लगा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हमें नेत्रदान को जन-आंदोलन बनाना होगा जिसके लिए स्कूल-कॉलेजों में बच्चों को इसके लिए जागरूक करना होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रक्तदान से किसी का जीवन बचता है, उसी प्रकार नेत्रदान से किसी का जीवन रोशन होता है। उन्होने कहा कि मृत्यु के बाद हमारा शरीर तो राख हो जाता है, पर हमारी आंखें किसी और की आंखों में जिंदा रह सकती हैं। इससे बड़ा जीवन का कोई अर्थ नहीं हो सकता। उन्होने कहा कि एक नेत्रहीन व्यक्ति के लिए आंखों की रोशनी पाना एक जन्म के समान है। इसलिए आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि जीते जी रक्तदान, मरने के बाद नेत्रदान। इस अवसर पर 50 महिलाओं ने नेत्रदान के फार्म भरे तथा उन्हें गोल्ड मेडल पहनाकर क्लब की तरफ से सम्मानित किया गया। लायन्स क्लब सिरसा अमर द्वारा पूरे सिरसा शहर में नेत्रदान पखवाड़ा चलाया जाएगा और सैंकड़ों नेत्रदान के फार्म भरवाएं जाएगे। @newstodayhry #newstodayhry

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