बड़ागुढ़ा (गुरनैब दंदीवाल) ग्वार, बाजरा सहित बीटी कॉटन, कपास की खेती में कम मुनाफे, गुलाबी सुंडी के प्रकोप और अनिश्चित मौसम के कारण हरियाणा और पंजाब के कई किसान देखादेखी।।
बड़ागुढ़ा (गुरनैब दंदीवाल) ग्वार, बाजरा सहित बीटी कॉटन, कपास की खेती में कम मुनाफे, गुलाबी सुंडी के प्रकोप और अनिश्चित मौसम के कारण हरियाणा और पंजाब के कई किसान देखादेखी।।

बड़ागुढ़ा -(गुरनैब दंदीवाल) :-ग्वार, बाजरा सहित बीटी कॉटन, कपास की खेती में कम मुनाफे, गुलाबी सुंडी के प्रकोप और अनिश्चित मौसम के कारण हरियाणा और पंजाब के कई किसान देखादेखी अब सब्जियों की खेती की ओर रुख करने लगे हैं, जो एक उत्कृष्ट निर्णय है। इस संबंध में जानकारी देते हुए बड़ागुढ़ा क्षेत्र के गांव कुरगांवाली से सतपाल सिंह भारती ने बताया कि हमारे क्षेत्र में बीटी कॉटन भी अब धीरे-धीरे फ्लॉप होने लगा है। ऐसे में किसान भाई घाटे का सौदा नरमा की खेती करने से कतराने लगे हैं। अतः अब किसानों ने सब्जियां उगाने के लिए मन बना लिया है। उन्होंने बताया कि कुरगांवाली गांव के गुरतेज सिंह और हरदीप सिंह आदि किसानों ने सब्जी की खेती करना शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि सब्जियों की खेती कम समय में अधिक आय प्रदान कर सकती है, जो सालाना दो से ढाई लाख रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। ग्वार की फसल का रकबा भी धीरे-धीरे कम हो गया है। बीटी नरमा भी अब नहीं होता। नरमा की जगह इस बार उगाई जाने वाली प्रमुख सब्जियां और फसलें इस प्रकार हैं: मुख्य सब्जियां जैसे टमाटर, बैंगन, गोभी, मूली, गाजर और मटर जो न केवल पोषक तत्वों से भरपूर हैं, बल्कि बाजार में मांग में भी हैं। इसके अलावा बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी, तरोई, करेला और टिंडा भी शामिल हैं, जो किसानों को अच्छी आय दिला सकती हैं। इस बार दोनों किसानों द्वारा मिर्च की पौध और सभी सब्जियों का बीज गिल नर्सरी सरदूलेवाला से लेकर आए हैं। जिसके बाद खेत तैयार कर सिंचाई के साथ सब्जियां उगा रहे हैं। यदि इस बार सब्जियों में अच्छी बचत रही तो आगे सब्जियों का रकबा और बढ़ाया जाएगा। परवल और भिन्डी भी अच्छे विकल्प हैं, जो किसानों के लिए लाभदायक हो सकते हैं। सब्जी खेती की ओर बढ़ने के कारणों में गुलाबी सुंडी का प्रकोप, अधिक आय की संभावनाएं, कम समय में फसल तैयार होना और बेहतर मार्केटिंग शामिल हैं, जो किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसान मौसम के अनुरूप खेती करके, जैविक खेती और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करके आय बढ़ा सकते हैं और अपने खेतों को और भी उत्पादक बना सकते हैं। किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए।। #Newstodayhry @Newstodayhry




