इलेक्ट्रोहोम्योपैथी शिक्षा को मिली नई दिशा, सर्वोदय इंस्टीट्यूट में अत्याधुनिक लैब शुरू ll
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी शिक्षा को मिली नई दिशा, सर्वोदय इंस्टीट्यूट में अत्याधुनिक लैब शुरू ll

सिरसा-(अक्षित कम्बोज):-बिसन इंस्टीट्यूट आॅफ इलेक्ट्रोहोम्योपैथी एजूकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (आरआईईआरएफ) द्वारा संचालित सर्वोदय इंस्टीट्यूट आॅफ इलेक्ट्रोहोम्योपैथी धर्मशाला स्थित बगली में अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित एक प्रयोगशाला का लोकार्पण किया गया। सिरास स्थित रोग मुक्ति इलैक्ट्रोहोम्योपैथी के संचालक डा. राजेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथि डा. संजीव शर्मा ने रिबन काटकर व दीप प्रज्जवलित कर प्रयोगशाला का शुभारंभ किया। डा. संजीव शर्मा ने बताया कि यहां पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को चिकित्सा विज्ञान और औषधि निर्माण प्रौद्योगिकी की शिक्षा प्रदान की जा रही है। वनस्पति-शास्त्र के अनुसार पेड़-पौधों में औषधीय गुणों से युक्त विभिन्न प्रकार के जैविकीय तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं । बकौल डा. संजीव शर्मा बताते हैं कि इस चिकित्सा पद्धति में न्यूनतम मात्रा में पौधे का उपयोग करके अधिकतम संख्या में दवा (डोजेज) का निर्माण होता है। यह दवा शरीर को स्वस्थ और ऊजार्वान बनाती है, जिससे रोग प्रतिरोधक प्रणाली मजबूत होती है। हिमाचल इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक चिकित्सक एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डा. रवि कुमार रबिसन ने आह्वान किया कि प्रदेश के युवाओं को इस पद्धति में प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार की दिशा में अग्रसर होना चाहिए । उन्होंने यह भी बताया कि यहां कई राज्यों के छात्र-छात्राएं तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स कर रहे हैं। इस अवसर पर संस्थान के छात्र-छात्राओं ने मुख्य अतिथि डा. संजीव शर्मा व विशिष्ट अतिथि डा. रवि कुमार रबिसन को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया और अपने विचार व्यक्त किए। संस्थान के प्राचार्य डा. अशोक भारद्वाज ने संस्थागत गतिविधियों के बारे जानकारी देते हुए बताया कि कार्यकारिणी समिति (निदेशक मंडल) के निर्देशानुसार सभी छात्र-छात्राओं को विभिन्न विषयों की पढ़ाई के साथ व्यक्तिगत जीवन जीने की कला भी सिखाई जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी समस्या का समाधान किया जा सके। आरआईईआरएफ के निदेशक सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने उपस्थित प्रतिभागियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि इस समय जीवन शैली से जुड़ी समस्याओं के अलावा मोबाइल फोन एडिक्शन के रोगियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, जो भविष्य में बहुत बड़ी चुनौती बन सकती है। उन्होंने बताया कि इस जटिल समस्या से निपटने के लिए समाज को जागरूक करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि सर्वोदय इंस्टीट्यूट में बच्चों के सर्वांगीण स्वास्थ्य और सांस्कृतिक उत्थान के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं।@newstodayhry #newstodayhry




