राष्ट्र निर्माण के लिए बच्चों में संस्कार, सामाजिक समरसता और स्वबोध जरूरी ll
राष्ट्र निर्माण के लिए बच्चों में संस्कार, सामाजिक समरसता और स्वबोध जरूरी ll

सिरसा – ( अक्षित कम्बोज ) संगम स्कूल भरोखां में विद्यार्थियों के मार्गदर्शन एवं संस्कार निर्माण के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय सह मंत्री रास बिहारी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण, संस्कार, स्वाभिमान, सामाजिक समरसता और स्वबोध के महत्व से अवगत करवाया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए रास बिहारी ने कहा कि राष्ट्र का भविष्य विद्यालयों में तैयार होता है और बच्चों में अच्छे संस्कार, अनुशासन, स्वाभिमान तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना राष्ट्र निर्माण की पहली सीढ़ी है। उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों को एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाए। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन सुबह उठकर अपने माता-पिता तथा घर के बड़े-बुजुर्गों को प्रणाम करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। बड़ों का सम्मान भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खेल, संस्कृति, नैतिक मूल्यों और धर्म-संस्कृति की जानकारी भी प्राप्त करनी चाहिए। जीवन में आगे बढ़ते हुए उनके मन में समाज और राष्ट्र के प्रति सेवा तथा समर्पण की भावना होनी चाहिए। रास बिहारी ने विद्यार्थियों को सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए कहा कि समाज तभी मजबूत बन सकता है, जब प्रत्येक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का सम्मान करे और आपसी भाईचारे की भावना से रहे। उन्होंने बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझने तथा अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वबोध अर्थात स्वयं की पहचान, अपनी जिम्मेदारियों और अपनी क्षमताओं का ज्ञान व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें मेहनत, अनुशासन और संस्कारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय के मुख्य अध्यापक छगन सेठी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे के जीवन के पहले गुरु उसके माता-पिता होते हैं। माता-पिता ही बच्चे को जीवन के प्रारंभिक संस्कार, व्यवहार और शिक्षा प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक बच्चे का कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता और अभिभावकों का सदैव सम्मान करे तथा उनका आशीर्वाद लेकर जीवन में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ उनके चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करने का कार्य भी करता है। यदि विद्यार्थी शिक्षा के साथ संस्कारों को अपने जीवन का हिस्सा बना लें तो वे न केवल अपने परिवार का नाम रोशन कर सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। सेठी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि बच्चों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, परोपकार, सहनशीलता, सामाजिक सद्भाव और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित किए जाएं। जब विद्यार्थी स्वयं अच्छे संस्कारों को अपनाएंगे और अपने आसपास के लोगों में भी सकारात्मक सोच एवं राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करेंगे, तभी एक सशक्त और संस्कारवान समाज का निर्माण संभव होगा। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के जिला प्रधान राकेश कटारिया, जनक राज चेयरमैन मार्किट कमेटी, मिल्ख राज कंबोज सरपंच ढ़ाणी भरोखां, संदीप हंस कंबोज मंडल अध्यक्ष भाजपा, डा. मदन लाल बैनीवाल, सज्जन कुमार सेठी एवं संगम स्कूल भरोखां का समस्त स्टाफ और ट्रांसपोर्ट स्टाफ तथा सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे। @newstodayhry #newstodayhry




